
Vikas Khanna On Lohri 2026 (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)
Vikas Khanna On Lohri 2026: विश्व प्रसिद्ध सेलिब्रिटी शेफ विकास खन्ना ने लोहड़ी और अन्य फसल त्योहारों के अवसर पर अपनी बचपन की यादों को साझा करते हुए भोजन के प्रति एक गहरा और भावनात्मक नजरिया पेश किया है। अमृतसर की गलियों में बड़े हुए विकास खन्ना के लिए लोहड़ी का मतलब सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो उनके दिल के बेहद करीब है। आईएएनएस (IANS) को दिए एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे पंजाब की मिट्टी और वहां के पारंपरिक स्वाद ने उनके जीवन और करियर को आकार दिया।
विकास ने याद करते हुए कहा, “बचपन में लोहड़ी की शामें एक अलग ही दुनिया होती थीं। घर में जलती हुई आग की गर्मी, लोक गीतों की मधुर आवाज और मां द्वारा बनाई गई मिठाइयों की खुशबू पूरे माहौल को जीवंत कर देती थी। रेवड़ी, गजक, मूंगफली और गुड़ की वह महक अब भी मेरे दिलो-दिमाग में बसी हुई है।” उनके अनुसार, यह केवल खाने का अनुभव नहीं था, बल्कि परिवार के अटूट प्यार और त्योहार की सामूहिक भावना का एक अभिन्न हिस्सा था।
शेफ विकास खन्ना का मानना है कि पंजाब का पारंपरिक व्यंजन सरसों का साग और मकई की रोटी उनके लिए महज एक रेसिपी नहीं, बल्कि यादों का एक पुल है। वे कहते हैं, “यह भोजन खेतों की खुशबू, सर्दियों की गुनगुनी धूप और परिवार की गर्माहट की याद दिलाता है। मेरे लिए इसके हर एक निवाले में एक कहानी छिपी है, जिसमें मेरी मां का प्यार और अमृतसर की वे सर्द शामें समाई हुई हैं।” उनके लिए यह व्यंजन उस सादगी और शुद्धता का प्रतीक है, जो भारतीय संस्कृति की पहचान है।
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विकास ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात साझा की कि उनके घर में भोजन को हमेशा एक ‘प्रार्थना’ के रूप में देखा जाता था। वे बताते हैं कि फसल के त्योहार पर खाने से पहले का समय बहुत शांत और ध्यानमय होता था। यह प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका था। उन्होंने कहा, “इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि हमें हर एक सामग्री (Ingredients) का सम्मान करना चाहिए। हमें खाने को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह प्रकृति और मेहनत का उपहार है।”
इंटरव्यू के दौरान शेफ ने जोर देकर कहा कि खाना सिर्फ रसोई से शुरू नहीं होता, बल्कि इसकी यात्रा खेत से शुरू होती है। भारत के अलग-अलग हिस्सों में मनाए जाने वाले त्योहार जैसे पोंगल, पिठा, पायसम या तिल-गुड़, भले ही स्वाद में अलग हों, लेकिन उनके पीछे की भावना एक ही होती है। यह भावना है—आभार की। यह त्योहार हमें याद दिलाते हैं कि हर व्यंजन में किसान की कड़ी मेहनत, प्रकृति का योगदान और समय का धैर्य शामिल होता है।
अंत में, विकास खन्ना ने कहा कि त्योहार केवल स्वादिष्ट भोजन चखने का अवसर नहीं हैं, बल्कि यह हमारी संस्कृति और जीवन जीने के तरीके का सम्मान करने का जरिया हैं। आपको बता दें कि शेफ विकास खन्ना इन दिनों लोकप्रिय कुकिंग रियलिटी शो ‘मास्टरशेफ इंडिया’ में जज की भूमिका निभा रहे हैं और लगातार भारतीय खानपान को वैश्विक स्तर पर पहचान दिला रहे हैं।






