ईरान-इजराइल युद्ध में चीन की रहस्यमयी चुप्पी… क्या बीजिंग केवल एक चालाक कर्जदाता है?

Iran China Alliance: ईरान-इजराइल युद्ध में चीन ने सैन्य मदद से दूरी बना ली है। 400 अरब डॉलर के समझौते के बाद भी ईरान को सिर्फ एक कर्जदाता की तरह देखता है और अपने खाड़ी हितों को प्राथमिकता दे रहा है।
China's Silent Role in Iran-Israel War: A Strategic Creditor or a Selfish Global Player?
ईरान-इजरायल युद्ध पर चीन चुप (सोर्स-सोशल मीडिया)
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US Israel Iran Military Conflict 2026: पश्चिम एशिया में जारी भीषण अमेरिका इजराइल ईरान सैन्य संघर्ष के बीच दुनिया की नजरें अब बीजिंग पर टिकी हुई हैं। ईरान के साथ 25 साल के सुरक्षा समझौते और भारी निवेश के दावों के बावजूद चीन की रहस्यमयी चुप्पी ने सबको हैरान कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस भीषण जंग में एक भरोसेमंद साथी की जगह केवल एक चालाक कर्जदाता की भूमिका निभा रहा है। बीजिंग अपने बड़े आर्थिक हितों को बचाने के लिए ईरान को मझधार में छोड़कर खाड़ी देशों के साथ खड़ा नजर आ रहा है।

चीन की आर्थिक नीति और ईरान का साथ

चीन और ईरान के बीच साल 2021 में हुए 25 साल के व्यापक सहयोग समझौते को लेकर शुरू में बहुत बड़े दावे किए गए थे। कहा गया था कि बीजिंग ईरान में 400 अरब डॉलर का निवेश करेगा, लेकिन युद्ध शुरू होते ही चीन का असली चेहरा सामने आ गया। जमीनी हकीकत यह है कि चीन ने कभी भी ईरान को किसी भी तरह की ठोस सैन्य सुरक्षा गारंटी देने का वादा नहीं किया था।

खाड़ी देशों के व्यापार बनाम ईरान का संकट

चीन के लिए ईरान से ज्यादा महत्वपूर्ण उसके व्यापारिक संबंध खाड़ी सहयोग परिषद के देशों के साथ हैं जिनका व्यापार 500 अरब डॉलर से अधिक है। सऊदी अरब जैसे देशों में चीन का निवेश ईरान के मुकाबले कहीं अधिक है, इसलिए वह इन देशों को नाराज करने का जोखिम नहीं उठा सकता। ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले उन्हीं खाड़ी देशों को निशाना बना रहे हैं जहां चीन के सबसे बड़े व्यावसायिक और आर्थिक हित जुड़े हुए हैं।

रूस की चेतावनी और वैश्विक तेल का हाहाकार

इधर रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने इस भीषण संघर्ष को 'तीसरे विश्वयुद्ध' की शुरुआत बताते हुए पूरी दुनिया को एक बड़ी चेतावनी दी है। युद्ध के कारण वैश्विक तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें अचानक बहुत तेजी से बढ़ने लगी हैं। भारत सरकार ने राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि उसके पास 25 दिनों का तेल भंडार है और अगले 25 दिनों तक दाम नहीं बढ़ेंगे।

ईरान की चुनौती और ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिका को सीधी चुनौती देते हुए कहा है कि उनके दुश्मनों के लिए अब नर्क के दरवाजे पूरी तरह खुल चुके हैं। इजराइली हमलों ने ईरान के नतांज परमाणु ठिकाने और 500 साल पुराने ऐतिहासिक गोलिस्तान पैलेस जैसी विश्व धरोहरों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। चीन की यह सोची-समझी चुप्पी दर्शाती है कि वह केवल एक आर्थिक खिलाड़ी है जो जोखिम भरे युद्धों में सीधे तौर पर कूदने से हमेशा बचता है।

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