
फ्रीडम एट मिडनाइट (फोटो-सोर्स,सोशल मीडिया)
Freedom at Midnight 2 Movie: भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं जिनकी अभिनय शैली समय से परे है। ओम पुरी उन्हीं में से एक थे, जिन्हें उनकी सादगी, दमदार अदाकारी और सच्चे सिनेमा के लिए आज भी याद किया जाता है। उन्होंने कभी रोल के साइज को महत्व नहीं दिया, बल्कि हर किरदार में जान डाल दी। इसी विचारधारा से प्रेरित होकर अभिनेता अभिषेक बनर्जी ने अपनी हालिया सीरीज ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ में निभाए गए एक छोटे लेकिन प्रभावशाली किरदार को ओम पुरी को समर्पित किया है।
आईएएनएस से बातचीत में अभिषेक बनर्जी ने कहा कि ओम पुरी उनके सबसे पसंदीदा कलाकारों में से एक रहे हैं। उन्होंने बताया कि ओम पुरी ने अपने करियर में जिस तरह के विविध और चुनौतीपूर्ण किरदार चुने, वह किसी भी मायने में एक असली हीरो से कम नहीं थे। ओम पुरी का मानना था कि रोल बड़ा है या छोटा, यह मायने नहीं रखता अहम बात यह है कि कलाकार उस किरदार को कितनी सच्चाई से निभाता है। अभिषेक ने कहा कि उन्होंने इसी सोच को अपनाते हुए अपनी कैमियो भूमिका को पूरी ईमानदारी से निभाया।
‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ में अभिषेक का किरदार एक ऐसे व्यक्ति का है, जो सांप्रदायिक हिंसा में अपनी गर्भवती पत्नी को खो देता है। इस गहरे आघात के बाद उसके भीतर बदले की भावना जन्म लेती है, लेकिन कहानी का मोड़ उसे महात्मा गांधी के सामने आत्मसमर्पण करने तक ले जाता है। यह किरदार सिर्फ एक व्यक्ति के दर्द की कहानी नहीं है, बल्कि भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान पैदा हुई सामाजिक और धार्मिक जटिलताओं को भी दर्शाता है।
इस किरदार की भावनात्मक गहराई ओम पुरी के उस ऐतिहासिक रोल से जुड़ती है, जो उन्होंने 1982 की फिल्म ‘गांधी’ में निभाया था। बेन किंग्सले स्टारर और रिचर्ड एटनबरो द्वारा निर्देशित इस फिल्म में ओम पुरी की परफॉर्मेंस आज भी याद की जाती है। अभिषेक ने बताया कि जब निर्देशक निखिल ने उन्हें यह रोल ऑफर किया, तो उन्होंने बिना देर किए हां कर दी, क्योंकि उनका मानना है कि इंडस्ट्री की असली भावना हर कलाकार को अलग-अलग तरह के किरदार निभाने का मौका देना है।
ये भी पढ़ें- ‘स्ट्रेंजर थिंग्स’ फिनाले पर बवाल! क्या डफर ब्रदर्स ने ChatGPT से लिखवाई आखिरी कहानी?
अभिषेक बनर्जी ने साफ कहा कि ओम पुरी से अपनी तुलना करना संभव नहीं है, क्योंकि वे सिनेमा के एक आइकॉन थे। हालांकि, उनके रास्ते पर चलना अपने आप में सम्मान की बात है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार छोटे रोल ही दर्शकों पर सबसे गहरी छाप छोड़ते हैं। ‘फ्रीडम एट मिडनाइट 2’ के रिलीज के बाद सोशल मीडिया पर मिल रही तारीफ इस बात का सबूत है। यह सीरीज बंटवारे के बाद की अशांति, सांप्रदायिक हिंसा, शरणार्थियों की समस्याएं और राजनीतिक तनाव को दर्शाती है, जो फिलहाल Sony LIV पर स्ट्रीम हो रही है।






