

What is Rocket Force: भारतीय थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा है कि हमारी सेना को रॉकेट मिसाइल फोर्स की जरूरत है। चीन इसका गठन 2015 में कर चुका है। पाकिस्तान ने भी ऑपरेशन सिंदूर में मिली करारी शिकस्त के बाद पिछले साल ही रॉकेट फोर्स बनाने की घोषणा की है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर ये रॉकेट फोर्स होती क्या है? कैसे काम करेगी और इससे भारतीय सेना की क्षमता कैसे बढ़ जाएगी?
युद्ध के तरीकों के बदले दौर में रॉकेट फोर्स लंबी दूरी तक सटीक मार करने में किसी सेना को सक्षम बनाती है। अमूमन तोपखाने की मारक क्षमता 5-50 किलोमीटर तक होती है, जबकि इससे अधिक दूरी तक मार करने में मल्टी बैरल रॉकेट लांचर और क्रूज और सबसोनिक मिसाइलों का उपयोग किया जाता है।
रॉकेट फोर्स एकीकृत इकाई के रूप में काम करते हुए मिसाइल, रॉकेट हथियारों को संचालित, नियंत्रित और उन्हें फायर करती है। आमतौर पर रॉकेट फोर्स का उद्देश्य पारंपरिक और परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम मिसाइलों को उपयोग करना होता है। वर्तमान में रॉकेट फोर्स को गेम चेंजर माना जाता है।
भारतीय सेना के लिए रॉकेट फोर्स की जरूरत बहुत पहले से महसूस की जा रही। इसके गठन को लेकर पहले सीडीएस जनरल विपिन रावत ने जोर दिया था, ताकि चीन और पाकिस्तान की आक्रामकता से अधिक बेहतर तरीके से निपटा जा सके। अभी भारतीय सेना में कोर ऑफ आर्टिलरी, सामरिक बल कमांड के तहत मिसाइल क्षमताओं को संचालित किया जाता है।
भारतीय रॉकेट फोर्स के गठन में कई अहम मिसाइलों को शामिल करने के साथ-साथ इसके संचालन के लिए इंटीग्रेटेड कमांड प्रणाली को विकसित किया जाएगा। माना जा रहा कि गैर परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों के इतर रॉकेट फोर्स में पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम के एडवांस वर्जन, ब्रम्होस क्रूज मिसाइल, प्रलय मिसाइल, हाइपरसोनिक मिसाइल, निर्भय सबसोनिक मिसाइलें होंगी। ये मिसाइलें जमीन से जमीन पर सटीक और घातक प्रहार करने में सक्षम हैं। इससे सेना को 500 से हजार किलोमीटर तक मार करने में क्षमता मिलेगी।
भारत ने लंबी रिसर्च के बाद स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों को विकसित कर लिया है। पृथ्वी से अग्रि मिसाइल सिस्टम के-4, के-15 मिसाइलों के माध्यम से भारत की न्यूक्लियर ट्रायड मजबूत हुई है। इसके अलावा प्रलय मिसाइलों की खरीद की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। ब्रम्होस मिसाइल के प्रोडक्शन को बढ़ाने के लिए लखनऊ में प्लांट तैयार हो रहा।