Chandrashekhar Azad Meerut: नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मेरठ में सोनू कश्यप के परिवार से मिलने से रोके जाने पर उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को ‘लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला’ करार दिया और मुख्यमंत्री को सीधे चुनौती दी है।
सूत्रों के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद मेरठ में सोनू कश्यप के शोकाकुल परिवार से मिलने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक लिया। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आजाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में “खुलेआम गुंडा राज” चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोई गरीबों, दलितों और पिछड़ों की आवाज बनकर उनकी मदद के लिए आगे बढ़ता है, तो सरकार के इशारे पर पुलिस और प्रशासन उनके साथ भी गुंडों जैसा व्यवहार करते हैं।
आजाद ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि एक चुने हुए जनप्रतिनिधि को पीड़ित परिवार से मिलने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने फोन पर पीड़ित मां और बहन की पीड़ा सुनी है और जब वे घटना स्थल से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर खड़े हैं, तो उन्हें रोकना यह दर्शाता है कि प्रशासन कुछ न कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इस स्थिति को “लोकतंत्र का चीरण” और लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला विषय बताया है।
Chandrashekhar Azad Meerut: नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मेरठ में सोनू कश्यप के परिवार से मिलने से रोके जाने पर उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को ‘लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला’ करार दिया और मुख्यमंत्री को सीधे चुनौती दी है।
सूत्रों के अनुसार, चंद्रशेखर आजाद मेरठ में सोनू कश्यप के शोकाकुल परिवार से मिलने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक लिया। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए आजाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में “खुलेआम गुंडा राज” चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कोई गरीबों, दलितों और पिछड़ों की आवाज बनकर उनकी मदद के लिए आगे बढ़ता है, तो सरकार के इशारे पर पुलिस और प्रशासन उनके साथ भी गुंडों जैसा व्यवहार करते हैं।
आजाद ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि एक चुने हुए जनप्रतिनिधि को पीड़ित परिवार से मिलने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने फोन पर पीड़ित मां और बहन की पीड़ा सुनी है और जब वे घटना स्थल से मात्र 1 किलोमीटर की दूरी पर खड़े हैं, तो उन्हें रोकना यह दर्शाता है कि प्रशासन कुछ न कुछ छिपाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इस स्थिति को “लोकतंत्र का चीरण” और लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला विषय बताया है।






