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PF अकाउंट होल्डर को मिलता है 7 लाख का फ्री इंश्योरेंस, कैसे उठा सकते हैं फायदा?
EPFO Free Insurance: ईपीएफ अंशदाता या सदस्य कर्मचारी की असामयिक मौत होती है तो उनके नामित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी बीमा कवर का दावा कर सकते हैं।
- Written By: रंजन कुमार

पीएम अकाउंट होल्डर को मिलने वाला इंश्योरेंस। इमेज-एआई
EPFO Free Insurance: आप संगठित क्षेत्र में कार्यरत और आपके कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) से पैसे की कटौती होती है तो आप 7 लाख तक के मुफ्त बीमा के अंतर्गत आते हैं। यह बीमा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सभी अंशदाताओं/ सदस्य कर्मचारियों के लिए है। यह कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना 1976 (ईडीएलआई) के तहत दिया जाता है। हर ईपीएफ खाताधारक ईडीएलआई योजना अंतर्गत आता है। ईडीएलआई योजना उन कर्मियों के फैमिली को भी कवर करती है, जिन्होंने अपनी मौत से ठीक पहले 12 महीनों में एक से अधिक कंपनियों में काम किया हो।
किसी सदस्य कर्मचारी का नामित व्यक्ति बीमारी, आकस्मिक मौत या प्राकृतिक निधन के कारण बीमा का दावा कर सकता है। ईडीएलआई योजना के तहत न्यूनतम बीमा राशि 2.5 लाख रुपए है। अधिकतम राशि 7 लाख रुपए है। कर्मचारी के पिछले 12 महीनों के औसत वेतन, महंगाई भत्ते और उनके पीएफ खाते में जमा राशि को बीमा राशि निर्धारित करने का आधार माना जाता है।
बीमा के लिए कर्मचारी के खाते से राशि नहीं काटी जाती
कर्मचारी ईडीएलआई में कोई राशि या प्रीमियम का योगदान नहीं करता। कंपनी कर्मचारी के मूल वेतन और महंगाई भत्ते का केवल 0.50% योगदान करती है। वैसे, ध्यान रखें कि कर्मचारी के वास्तविक मूल वेतन की परवाह किए बिना अधिकतम मूल वेतन सीमा 15,000 रुपए होगी। ईडीएलआई योजना के तहत दावों का भुगतान एकमुश्त होता है। अगर, सदस्य कर्मचारी ने योजना के तहत कोई नामांकन नहीं किया है यानी किसी को नामांकित व्यक्ति नहीं बनाया है तो कवरेज का लाभ मृतक कर्मचारी के जीवनसाथी, अविवाहित बेटियों और नाबालिग बेटे को मिलेगा। मगर, यह आवश्यक है कि मृतक सदस्य कर्मचारी ईपीएफ का सक्रिय योगदानकर्ता हो। मतलब उसकी मौत तक उसकी ओर से पीएफ में योगदान जारी रहे। संगठित क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों के मूल वेतन और महंगाई भत्ते का 12% कर्मचारी योगदान के रूप में ईपीएफ में जाता है। कंपनी/ नियोक्ता भी 12% का योगदान देता है। मगर, नियोक्ता के 12% में से 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस और शेष ईपीएफ में जाता है।
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कैसे करें दावा?
किसी ईपीएफ अंशदाता यानी सदस्य कर्मचारी की असमय मौत होती है तो उसका नामिती या कानूनी उत्तराधिकारी बीमा कवर का दावा कर सकता है। दावेदार की आयु 18 वर्ष से कम है तो उसका अभिभावक उसकी ओर से दावा कर सकता है। ऐसा करने के लिए बीमा कंपनी को कर्मचारी का मृत्यु प्रमाण पत्र, उत्तराधिकार प्रमाण पत्र, अभिभावक किसी नाबालिग नामिती की ओर से दावा कर रहा है तो संरक्षकता प्रमाण पत्र और बैंक विवरण प्रदान करना होगा। पीएफ खाते के लिए कोई नामिती नहीं है तो कानूनी उत्तराधिकारी दावा कर सकता है।
यह भी पढ़ें: नौकरी छोड़ने पर PF निकासी आसान, EPFO ने कर्मचारियों को दी बड़ी राहत; अब तुरंत निकाल सकेंगे 75% राशि
इन लोगों से कराना होगा सत्यापित
ईपीएफ खाते से निकासी के लिए नियोक्ता को जमा किए जाने वाले फॉर्म के साथ फॉर्म-5 आईएफ, बीमा कवर फॉर्म जमा करना होगा। फॉर्म का सत्यापन नियोक्ता करेगा। नियोक्ता द्वारा सत्यापन संभव नहीं है तो फॉर्म को नीचे उल्लिखित व्यक्तियों में से किसी एक द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए। राजपत्रित अधिकारी मजिस्ट्रेट डाकपाल या उप-डाकपाल सांसद या विधायक ग्राम पंचायत का अध्यक्ष सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (सीबीटी) या ईपीएफ की क्षेत्रीय समिति का सदस्य बैंक प्रबंधक (उस बैंक का जहां खाता था) नगरपालिका या जिला स्थानीय बोर्ड का अध्यक्ष/ सचिव/ सदस्य।
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