बांकीपुर विधानसभा: 30 वर्षों से BJP का अजेय दुर्ग, क्या विपक्ष के लिए कायम रहेगी 'कायस्थ चुनौती'?

Bihar Assembly Elections: पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा का अभेद्य गढ़ मानी जाती है। पिछले 30 वर्षों से यह सीट पार्टी के कब्जे में है।
Bankipur Assembly: BJP's invincible fort for 30 years, will the 'Kayastha challenge' remain for the opposition?
बांकीपुर विधानसभा, (कॉन्सेप्ट फोटो)
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Bankipur Assembly Constituency: बिहार की राजधानी पटना स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का एक ऐसा अभेद्य गढ़ है, जिसका चुनावी परिणाम लगभग तय माना जाता है। यह सीट दशकों से भाजपा की मजबूत पकड़ और एक स्थापित सियासी विरासत के कारण सुर्खियों में रहती है। 2020 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के कद्दावर नेता नितिन नबीन ने कांग्रेस उम्मीदवार को 39,036 वोटों के बड़े अंतर से हराकर इस सीट पर अपनी अजेय स्थिति को एक बार फिर साबित कर दिया था।

पिता-पुत्र की विरासत: 30 वर्षों का भगवा राज

बांकीपुर का राजनीतिक सफर 2008 के परिसीमन से पहले की 'पटना वेस्ट' सीट से जुड़ा है। यहां भाजपा का दबदबा 1990 के दशक में शुरू हुआ और लगातार बरकरार रहा।

नवीन किशोर सिन्हा का प्रभुत्व: भाजपा के नेता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने 1995 से लगातार चार बार इस सीट पर जीत का परचम लहराया।

नितिन नबीन का उदय: उनके निधन के बाद, उनके बेटे नितिन नबीन ने 2006 के उपचुनाव में जीत हासिल कर राजनीतिक विरासत को संभाला। नबीन यहीं नहीं रुके, उन्होंने परिसीमन के बाद बनी बांकीपुर सीट पर 2010, 2015 और 2020 के चुनावों में लगातार तीन बार जीत दर्ज करके इस सीट को भाजपा का अजेय दुर्ग बना दिया।

निरंतरता का रिकॉर्ड: पिछले लगभग 30 वर्षों से यह सीट भाजपा के कब्जे में है, जो बिहार की राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि है।

जातीय समीकरण: निर्णायक 'कायस्थ' फैक्टर बांकीपुर विधानसभा सीट का चुनावी गणित मुख्य रूप से एक समुदाय के इर्द-गिर्द घूमता है।

कायस्थ का गढ़: कायस्थ समुदाय इस क्षेत्र में सबसे अधिक संख्या में है और चुनावी नतीजों में निर्णायक भूमिका निभाता है। यह समुदाय पारंपरिक रूप से भाजपा का मजबूत समर्थक रहा है, जो पार्टी की लगातार जीत का मुख्य आधार है।

अन्य समुदाय: कायस्थों के अलावा, वैश्य और ब्राह्मण मतदाता भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं, जो भाजपा के पक्ष में एकजुट रहते हैं।

विपक्ष की चुनौती: राजद को अब तक यहां कोई जीत नहीं मिली है। 2020 में कांग्रेस प्रत्याशी लव सिन्हा दूसरे नंबर पर रहे थे, लेकिन जीत का अंतर काफी बड़ा था। हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार पुष्पम प्रिया चौधरी भी तीसरा स्थान ही हासिल कर पाई थीं।

लोकसभा पर भी प्रभाव

बांकीपुर विधानसभा सीट का यह मजबूत कायस्थ प्रभाव पटना साहिब लोकसभा सीट पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है:

शत्रुघ्न सिन्हा की जीत: अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने (जब वह भाजपा में थे) 2009 और 2014 में लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की।

वर्तमान स्थिति: 2024 के लोकसभा चुनाव में भी, कांग्रेस के अंशुल अविजीत के खिलाफ भाजपा के रविशंकर प्रसाद की जीत में बांकीपुर विधानसभा खंड से मिली बड़ी बढ़त निर्णायक साबित हुई।

2025 का चुनाव यह तय करेगा कि क्या भाजपा अपनी मजबूत पकड़ और सियासी विरासत को कायम रखती है, या विपक्ष कोई चमत्कार कर पाता है।

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