
मारुति सूजूकी एस-प्रेसो व डैटसन रेडी गो (डिजाइन फोटो)
नई दिल्ली: भारत समेत दुनियाभर में लोगों में कारों को लेकर एक अलग ही क्रेज देखने को मिलता है। एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि अब मैनुअल कारों की तुलना में ऑटोमैटिक कारों को काफी पसंद किया जा रहा है। लेकिन हम आपको बताएंगे कि आपके लिए ऑटोमैटिक या मैनुअल में से कौन सी कार फायदेमंद है।
पिछले कुछ सालों में ऑटोमैटिक कारों की मांग तेजी से बढ़ने लगी है। इसके पीछे की वजह यह है कि ऑटोमैटिक कारों को चलाना आसान होता है। इसके साथ ही ड्राइविंग के दौरान मुश्किल हालातों में भी इनका इंजन बंद नहीं होता। यही वजह है कि लोग मैनुअल की जगह ऑटोमैटिक कारें खरीदना पसंद करते हैं।
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ऑटोमैटिक कारों को चलाना आसान होता है, जिसकी वजह से ग्राहक इसकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि, इसकी कीमत मैनुअल कारों से काफी ज्यादा होती है। ऐसे में यह आपकी जेब पर अतिरिक्त बोझ की तरह लगती है। यही वजह है कि निम्न-मध्यम वर्ग मैनुअल पर ज्यादा ध्यान देता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में वाहनों की कुल बिक्री में ऑटोमैटिक की हिस्सेदारी 16 फीसदी थी। जो अब बढ़कर 26 फीसदी हो गई है। जैटो डायनेमिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक 20 बड़े शहरों में बिकने वाली हर 3 में से एक कार ऑटोमैटिक है, जिसे प्रीमियम सेगमेंट में रखा गया है।
देश की सबसे सस्ती ऑटोमैटिक कार डैटसन रेडी-गो है। इसमें 999 सीसी का इंजन लगा है। कंपनी एक लीटर पेट्रोल में 22 किलोमीटर तक जाने का दावा करती है। यह 5 सीटर कार है, जो 6 कलर ऑप्शन के साथ आती है। कीमत की बात करें तो इसकी कीमत 4.96 लाख रुपये एक्स-शोरूम है। वहीं इसके मैनुअल वेरिएंट की शुरुआती कीमत 3.98 लाख रुपये है।
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दूसरी कार मारुति सुजुकी एस-प्रेसो है, जो मारुति की सबसे सस्ती ऑटोमैटिक कार है। इसमें 998 सीसी का इंजन लगा है। कंपनी का दावा है कि यह एक लीटर पेट्रोल में 21.5 किमी तक का माईलेज निकालती है। इस 5 सीटर कार का ऑटोमैटिक वर्जन 5.4 लाख (एक्स-शोरूम) से शुरू होता है। इसके मैनुअल वेरिएंट की शुरुआती कीमत 3.85 लाख रुपये है।






