यमन बॉर्डर पर 20 हजार सैनिक तैनात! आमने-सामने आए ये दो देश, क्या फिर शुरू होने जा रही नई जंग?

Middle East Tension: यमन का गृह युद्ध एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। सऊदी सीमा के पास हजारों सैनिकों की तैनाती और यूएई समर्थित दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद पर बढ़ते दबाव ने पूरे क्षेत्र में...
20,000 troops deployed on the Yemen border! Saudi Arabia and the UAE are at loggerheads; is a new war about to begin?
यमन के दक्षिणी प्रांत अबयान में दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद की सेनाएं एक पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचीं, फोटो (सो.रॉयटर्स)
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World News In Hindi: यमन में जारी लंबे और उलझे हुए गृह युद्ध की स्थिति अब और अधिक गंभीर होती नजर आ रही है। सऊदी अरब से लगी यमन की सीमा के पास करीब 20 हजार सऊदी समर्थित सैनिकों की तैनाती की खबरों ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है।

यह सैन्य जमावड़ा ऐसे वक्त पर हो रहा है, जब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के समर्थन वाले अलगाववादी संगठन दक्षिणी संक्रमणकालीन परिषद (एसटीसी) पर पूर्वी यमन के तेल से भरपूर हद्रामौत प्रांत में हाल ही में हासिल किए गए इलाकों को छोड़ने का दबाव तेज हो गया है।

कई महत्वपूर्ण ठिकानों को भारी नुकसान

एसटीसी इन हालिया सैन्य बढ़त को यमन के दो हिस्सों उत्तर और दक्षिण में दोबारा विभाजन की अपनी पुरानी मांग को मजबूती देने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1990 से पहले यमन दो अलग-अलग देशों के रूप में अस्तित्व में था। सूत्रों का कहना है कि यूएई समर्थित एसटीसी को सऊदी अरब की ओर से सीधे हवाई कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। यदि ऐसा होता है, तो एसटीसी के कई महत्वपूर्ण ठिकानों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इसी दौरान, सऊदी अरब की फंडिंग से संचालित ‘नेशनल शील्ड’ मिलिशिया के तहत भर्ती किए गए, बेहतर वेतन पाने वाले लड़ाकों को सऊदी सीमा से सटे अल-वदीह और अल-अब्र क्षेत्रों में तैनात किया जा रहा है।

सीधे टकराव की आशंका बढ़ी

दूसरी ओर, एसटीसी को यह भरोसा दिलाया गया है कि उसके पीछे यूएई का समर्थन बना रहेगा। इस कारण सऊदी अरब और यूएई समर्थित गुटों के बीच सीधे टकराव की आशंका बढ़ गई है, जिससे यमन का संकट एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।

संयुक्त राष्ट्र ने भी जताई गंभीर चिंता

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यमन में बड़े पैमाने पर लड़ाई फिर से शुरू होने से लाल सागर, अदन की खाड़ी और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में दूरगामी और गंभीर परिणाम हो सकते हैं। गुटेरेस ने यमन के सभी पक्षों, जिनमें बाहरी ताकतें भी शामिल हैं, से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि एकतरफा कदम शांति नहीं, बल्कि विभाजन और अस्थिरता को और गहरा करेंगे।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यमन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का संरक्षण बेहद जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, उत्तर में हौथी विद्रोहियों और दक्षिण में बुरी तरह विभाजित सैन्य गुटों के बीच वर्षों से जारी संघर्ष के कारण लगभग 50 लाख यमनी नागरिक अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हो चुके हैं।

सैन्य मौजूदगी बढ़ाई

इसी बीच, सऊदी प्रभाव वाले शहर अदन में हाल में हुई बातचीत के दौरान एसटीसी ने साफ कर दिया कि वह सऊदी सेना की वापसी की मांग को नहीं मानेगा। सऊदी अरब दो सप्ताह पहले ही हद्रामौत में अपने सैनिक उतार चुका है और इसके बाद ओमान की सीमा से लगे अल-महारा प्रांत में भी अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। इसके अलावा, अबयान प्रांत में सेना भेजकर सऊदी अरब ने दक्षिणी यमन में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है।

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