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दुनिया के वो देश जहां नहीं बहती एक भी नदी, फिर भी ऐसे बुझती है करोड़ों लोगों की प्यास; जानें दिलचस्प तकनीक
Countries With No Rivers: सऊदी अरब, यूएई और मालदीव जैसे दुनिया के कई देशों में एक भी स्थायी नदी नहीं है। जानिए ये देश बिना नदियों के अपनी पानी की जरूरतें कैसे पूरी करते हैं।
- Written By: अमन उपाध्याय

कॉन्सेप्ट फोटो (सो. AI)
Countries Without Rivers or Lakes: मानव सभ्यता के इतिहास में नदियों का योगदान मुख्य रूप से जरूरी रहा है। प्राचीन काल से ही बस्तियां नदियों के किनारे ही होती थी क्योंकि नदियों की वजहा से पानी, भोजन के साथ ही परिवहन का मुख्य जरिया थीं लेकिन क्या आपको ये बात पता है दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं जहां एक भी नदियां नहीं है। इन देशों ने अपनी भौगोलिक चुनौतियों को मात देते हुए पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है।
बिना नदी वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश
सऊदी अरब क्षेत्रफल के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा देश है जहां कोई स्थायी नदी नहीं है। यहां का विशाल रेगिस्तानी परिदृश्य ‘वाडी’ (Wadis) से भरा है। ये सूखी नदी की क्यारियां हैं जो केवल दुर्लभ बारिश के दौरान ही भरती हैं और फिर जल्द ही सूख जाती हैं। अपनी प्यास बुझाने के लिए यह देश मुख्य रूप से प्राचीन भूजल भंडार पर निर्भर है।
UAE और कतर की क्या है तकनीक?
सऊदी अरब की तरह ही यूएई में भी कोई नदी नहीं है। यहां की अत्यधिक शुष्क जलवायु और बढ़ते शहरीकरण के कारण पानी की किल्लत एक बड़ी चुनौती है। इससे निपटने के लिए यूएई और कतर जैसे देश दुनिया के सबसे उन्नत ‘डिसेलिनेशन’ यानी समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले संयंत्रों का उपयोग करते हैं। कतर में ताजे पानी की धाराओं या झीलों की पूरी कमी है इसलिए वहां कुशल वितरण प्रणालियों के जरिए आबादी की जरूरतें पूरी की जाती हैं।
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कुवैत और बहरीन में पानी मिलना मुश्किल
कुवैत में भी नदियों या स्थायी जलधाराओं का नामोनिशान नहीं है। यहां तापमान इतना अधिक होता है कि प्राकृतिक रूप से मीठे पानी का मिलना बहुत ही मुश्किल है। वहीं, बहरीन के पास कभी समुद्र के नीचे ताजे पानी के प्राकृतिक झरने हुआ करते थे। जिसके वजह से खेती में बहुत ही मदद मिलती थी लेकिन ज्यादा पानी के खपत के कारण वह भी सूख गए हैं। अब ये दोनों देश डिसेलिनेशन और मीठे पानी के आयात पर निर्भर हैं।
ओमान और मालदीव का अनूठा प्रबंधन
ओमान में स्थायी नदियां नहीं हैं लेकिन यहां की ‘वाइयां’ मानसून के दौरान पानी से भर जाती हैं। ओमान के लोग ‘अफलाज’ नामक अपनी पारंपरिक सिंचाई प्रणाली के जरिए इस मौसमी पानी का वितरण करते हैं। वहीं, मालदीव जैसे द्वीपीय देश में नदियों के लिए कोई ऊंचाई नहीं है। यहां बारिश का पानी जमीन में रिसकर ‘मीठे पानी के लेंस’ बनाता है जिसका बड़ी सावधानी से संरक्षण किया जाता है।
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क्या यूरोप में भी नहीं है नदी?
यूरोप में माल्टा एक ऐसा देश है जहां नदियां नहीं हैं केवल बारिश के बाद छोटी जलधाराएं दिखाई देती हैं जो कुछ ही समय में सूख जाती हैं। यहां की चूना पत्थर वाली जमीन पानी को सोख लेती है इसलिए भूजल और डिसेलिनेशन यहां मुख्य स्रोत हैं। ये सभी देश साबित करते हैं कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद नवाचार और प्रबंधन के जरिए जीवन संभव है।
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