

US Deploys Ukraine Anti Drone System Saudi Arabia: मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव और ईरानी ड्रोनों की बढ़ती मारक क्षमता ने अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों में अमेरिकी सैन्य विमानों और इमारतों को हुए महत्वपूर्ण नुकसान के बाद, अमेरिकी सेना ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर यूक्रेन का अत्याधुनिक कमांड-एंड-कंट्रोल प्लेटफॉर्म 'स्काई मैप' तैनात कर दिया है। पांच सूत्रों के हवाले से मिली यह जानकारी दर्शाती है कि यह तैनाती पहले कभी सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट नहीं की गई थी।
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हाल के हफ्तों में यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों ने स्वयं प्रिंस सुल्तान एयर बेस का दौरा किया और अमेरिकी सैनिकों को 'स्काई मैप' सिस्टम के संचालन का गहन प्रशिक्षण दिया। यह प्लेटफॉर्म विशेष रूप से ईरान निर्मित शाहेद ड्रोनों का पता लगाने और इंटरसेप्टर ड्रोनों के जरिए उन्हें नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह रडार और सेंसर से प्राप्त डेटा को एकीकृत कर खतरे की सटीक स्थिति मानचित्रों और वीडियो फीड पर प्रदर्शित करता है।
यह खुलासा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के उस प्रस्ताव को ठुकराने के करीब एक महीने बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने ईरानी ड्रोन हमलों से निपटने में मदद की पेशकश की थी। 6 मार्च को एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि "हमें उनकी मदद की जरूरत नहीं है," लेकिन बेस पर हुए नुकसान ने पेंटागन को इस तकनीक का सहारा लेने पर मजबूर कर दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान से करीब 640 किलोमीटर दूर स्थित इस बेस पर यूक्रेनी तकनीक का उपयोग अमेरिकी हवाई और मिसाइल रक्षा व्यवस्था की बुनियादी कमजोरियों को उजागर करता है। हडसन इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो टिमोथी वाल्टन के अनुसार, अमेरिकी हवाई मिसाइल रक्षा कवरेज में लंबे समय से कमियां रही हैं, जिन्हें अच्छी तरह समझने के बावजूद पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था।
यह तैनाती उन हमलों के बाद हुई है जिनमें अमेरिकी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा था। 27 मार्च को हुए एक हमले में अमेरिकी वायुसेना का एक ई-3 एडब्ल्यूएसीएस (E-3 AWACS) रडार विमान नष्ट हो गया था, जबकि कई केसी-135 (KC-135) ईंधन भरने वाले टैंकर और थाड (THAAD) मिसाइल प्रणाली के रडार उपकरण भी क्षतिग्रस्त हुए थे। अब पेंटागन ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत ड्रोन रक्षा को मजबूत करने के लिए 350 मिलियन डॉलर का बजट आवंटित किया है।