

Dinesh Trivedi New High Commissioner Bangladesh: भारत सरकार ने कूटनीतिक मोर्चे पर एक बड़ा फेरबदल करते हुए पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने सोमवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। दिनेश त्रिवेदी की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ भारत के कूटनीतिक संबंध एक संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दिनेश त्रिवेदी वर्तमान उच्चायुक्त प्रणय वर्मा का स्थान लेंगे। वहीं, करियर डिप्लोमैट प्रणय वर्मा को नई जिम्मेदारी सौंपते हुए यूरोपीय संघ (EU) में भारत का राजदूत बनाकर ब्रसेल्स भेजा जा रहा है। सरकार के इस फैसले को भारत-बांग्लादेश के भविष्य के संबंधों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक माना जा रहा है।
75 वर्षीय दिनेश त्रिवेदी देश के अनुभवी राजनेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान न केवल रेल मंत्री बल्कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई थी। त्रिवेदी का राजनीतिक सफर काफी चर्चाओं में रहा है। वर्ष 2012 में रेल बजट पेश करते समय यात्री किराया बढ़ाने के उनके प्रस्ताव पर तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने कड़ा विरोध जताया था, जिसके बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
त्रिवेदी का संसदीय अनुभव भी काफी व्यापक है। वह वर्ष 2009 से 2019 तक पश्चिम बंगाल की बैरकपुर लोकसभा सीट से सांसद रहे और इसके अलावा 1990 से 2008 के बीच विभिन्न अवधियों में राज्यसभा के सदस्य भी रहे हैं। उन्होंने फरवरी 2021 में टीएमसी से नाता तोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था।
त्रिवेदी की नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब बांग्लादेश में बड़े राजनीतिक बदलाव हुए हैं। शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद और मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में कुछ कड़वाहट देखी गई थी। हालांकि, हाल ही में हुए संसदीय चुनावों में बीएनपी (BNP) के तारिक रहमान के प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद से दोनों देशों के संबंधों में सुधार के सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।
एक अनुभवी राजनेता को उच्चायुक्त बनाकर भेजना स्पष्ट करता है कि भारत सरकार बांग्लादेश के साथ अपने पुराने और मजबूत संबंधों को पुनः पटरी पर लाने के लिए गंभीर है। दिनेश त्रिवेदी के अनुभव का लाभ इन कूटनीतिक दूरियों को पाटने में मिल सकता है।