
अमेरिका का सीरिया में ISIS पर भीषण प्रहार (सोर्स-सोशल मीडिया)
US airstrikes against ISIS Syria: अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने सीरिया में ISIS के विरुद्ध ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ के तहत एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे निर्देश पर शुरू की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों का बदला लेना और आतंकी ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करना है।
इस मिशन में दो दर्जन से अधिक लड़ाकू विमानों का उपयोग किया गया, जिन्होंने आतंकियों के सुरक्षित ठिकानों पर सटीक निशाना साधते हुए भारी क्षति पहुंचाई है। सीरियाई क्षेत्र में सक्रिय इस्लामी आतंकवाद को जड़ से मिटाने के लिए अमेरिका ने अपनी सैन्य प्रतिबद्धता को एक बार फिर दुनिया के सामने स्पष्ट कर दिया है।
सेंटकॉम के अनुसार, ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक का निर्णय दिसंबर 2025 के मध्य में पल्मायरा में हुए आतंकी हमले के बाद लिया गया था। उस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक नागरिक दुभाषिया की जान चली गई थी, जिसका बदला लेने के लिए यह सैन्य मिशन शुरू किया गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी सेना को नुकसान पहुंचाने वालों को दुनिया के किसी भी कोने से ढूंढकर खत्म किया जाएगा।
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस बड़े ऑपरेशन के दौरान 90 से अधिक सटीक गोलाबारी की गई, जिसमें 35 से अधिक महत्वपूर्ण लक्ष्यों को निशाना बनाया गया। हवाई हमलों के लिए एफ-15 और अन्य आधुनिक लड़ाकू विमानों का उपयोग किया गया ताकि आतंकी ठिकानों को बिना किसी मानवीय चूक के नष्ट किया जा सके। इस हमले से ISIS की भविष्य में हमले करने की क्षमता को भारी झटका लगा है और उनके कमांड केंद्रों को मलबे में बदल दिया गया है।
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, पल्मायरा हमले में शहीद होने वाले सैनिकों की पहचान सार्जेंट एडगर ब्रायन टोरेस टोवर और सार्जेंट विलियम नथानिएल हॉवर्ड के रूप में हुई है। ये दोनों वीर सैनिक आयोवा नेशनल गार्ड के सदस्य थे और मिडिल ईस्ट में ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व के तहत तैनात किए गए थे। उनकी शहादत ने अमेरिकी सेना के मनोबल को कम करने के बजाय आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई को और अधिक तीव्र कर दिया है।
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वर्तमान में अमेरिका ने ISIS को हराने के मिशन के तहत मध्य पूर्व में लगभग 1,800 सैनिकों की तैनाती की हुई है जो सहयोगी बलों के साथ काम कर रहे हैं। सेंटकॉम का संदेश बहुत स्पष्ट है कि न्याय से बचने की कोशिश करने वाले आतंकियों को कतई बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ सैन्य दबाव जारी रहेगा। ऑपरेशन हॉकआई के जरिए अमेरिका ने क्षेत्र में अपने सहयोगियों और बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक कड़ा संदेश भेजा है।






