
अमेरिकी अदालतों से भारतीय प्रवासियों को बड़ी राहत (सोर्स-सोशल मीडिया)
Indian Immigrant Legal Rights US: अमेरिका की तीन संघीय अदालतों ने हाल ही में भारतीय नागरिकों से जुड़े इमिग्रेशन मामलों में ऐसे फैसले सुनाए हैं जो प्रवासियों के अधिकारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन न्यायिक निर्णयों ने भारतीय आप्रवासी कानूनी अधिकार को मजबूती प्रदान करते हुए इमिग्रेशन अधिकारियों के कामकाज और हिरासत की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अदालतों ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों का पालन करना एजेंसियों के लिए अनिवार्य है। इन फैसलों से उन भारतीयों को नई उम्मीद मिली है जो वर्षों से अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम की जटिलताओं और देरी का सामना कर रहे हैं।
मिशिगन की एक फेडरल कोर्ट ने भारतीय शरणार्थी आवेदक हरजोत सिंह के पक्ष में एक बड़ा फैसला सुनाया है जो लंबे समय से हिरासत में थे। अदालत ने इमिग्रेशन अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे सिंह को या तो तुरंत रिहा करें या फिर उन्हें पांच कार्यदिवसों के भीतर बॉन्ड हियरिंग दें। जज ने पाया कि जुलाई 2025 से ICI द्वारा उन्हें हिरासत में रखा जाना पूरी तरह गैरकानूनी है और यह उनके संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
हरजोत सिंह मई 2022 में अमेरिका पहुंचे थे और बाद में उन्होंने देश में शरण के लिए अपना आवेदन आधिकारिक रूप से दाखिल किया था। शुरुआत में उन्हें पैरोल पर रहने की अनुमति दी गई थी और उन्हें वर्क ऑथराइजेशन के साथ सोशल सिक्योरिटी नंबर भी प्राप्त हुआ था। हालांकि एक सामान्य चेक-इन के दौरान उन्हें अचानक गिरफ्तार कर लिया गया था जिसके बाद उन्होंने अपनी इस अवैध हिरासत को अदालत में चुनौती दी थी।
वाशिंगटन डीसी में एक अन्य फेडरल जज ने भारतीय नागरिक दिव्या वेणिगल्ला द्वारा यूएससीआईएस USCIS के खिलाफ दायर याचिका के एक हिस्से को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। वेणिगल्ला ने अपने इमिग्रेंट इन्वेस्टर ग्रीन कार्ड आवेदन की अपील को खारिज किए जाने के तरीके को अदालत में चुनौती दी थी क्योंकि इसे देरी का बहाना बनाकर रोका गया था। उन्होंने तर्क दिया था कि तकनीकी कारणों से उनकी अपील को खारिज करना अनुचित था और एजेंसी को समय सीमा में रियायत देनी चाहिए थी।
अदालत ने माना कि प्रशासनिक प्रक्रिया कानून के तहत दिव्या वेणिगल्ला का मामला आगे बढ़ सकता है क्योंकि एजेंसी ने उनके तर्कों पर सही ढंग से विचार नहीं किया। हालांकि उनकी कुछ अन्य मांगों को अदालत ने खारिज कर दिया लेकिन मुख्य कानूनी लड़ाई जारी रखने की अनुमति दे दी है जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है। यह फैसला उन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण है जो ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में तकनीकी गलतियों के कारण अक्सर प्रशासनिक बाधाओं का सामना करते हैं।
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मिसौरी की एक अदालत में हर्ष कुमार पटेल नामक भारतीय नागरिक के मामले में भी एक मिला-जुला लेकिन सकारात्मक फैसला सामने आया है। पटेल एक सशस्त्र डकैती का शिकार हुए थे और उन्होंने इसी आधार पर मानवीय आधार वाले यू वीजा के लिए आवेदन किया था। अदालत ने यू वीजा वेटिंग लिस्ट में नाम शामिल करने में हुई अत्यधिक देरी को लेकर उनके केस को आगे चलाने की अनुमति दी है ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
इन तीनों मामलों ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी न्यायिक प्रणाली इमिग्रेशन एजेंसियों की कथित मनमानी पर लगाम लगाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। भारतीय प्रवासियों के लिए ये फैसले न केवल व्यक्तिगत राहत हैं बल्कि भविष्य के अन्य कानूनी मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण नजीर पेश करते हैं। अदालतों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी व्यक्ति की स्वतंत्रता और उसके आवेदन की प्रक्रिया कानून सम्मत होनी चाहिए।






