
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स- सोशल मीडिया)
Donald Trump on Chagos Islands: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंद महासागर में स्थित रणनीतिक रूप से अहम डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ हुई “सकारात्मक” बातचीत के बाद ट्रंप ने यूके-मॉरीशस समझौते पर अपनी पहले की तीखी आलोचना को नरम किया है, लेकिन साथ ही एक कड़ी चेतावनी भी जारी की है।
ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर भविष्य में कभी भी यह समझौता टूटा या डिएगो गार्सिया में अमेरिकी सैन्य संचालन को किसी तरह का खतरा पैदा हुआ, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा और द्वीप पर अपनी मौजूदगी को बलपूर्वक सुरक्षित करेगा।
पिछले महीने डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन द्वारा चागोस द्वीप समूह की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने के फैसले को “पूर्ण कमजोरी” और “बड़ी मूर्खता” बताया था। लेकिन अब उन्होंने माना है कि मौजूदा परिस्थितियों में प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के पास यही सबसे बेहतर विकल्प था।
ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि वह समझते हैं कि यह समझौता राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से जटिल था, और स्टारमर ने संभवतः वही डील की जो उस समय की परिस्थितियों में सबसे व्यावहारिक थी।
हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि डिएगो गार्सिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर किसी भी तरह की आंच बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह बेस अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और हिंद महासागर के बीचों-बीच इसकी रणनीतिक स्थिति अमेरिकी सैन्य अभियानों की सफलता की एक बड़ी वजह रही है।
ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में लीज समझौता टूटा, या पर्यावरणीय या संप्रभुता से जुड़े “झूठे दावों” के नाम पर अमेरिकी ऑपरेशनों को कमजोर करने की कोशिश की गई, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप का अधिकार सुरक्षित रखेगा।
चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में स्थित 60 से अधिक छोटे द्वीपों का समूह है। यह क्षेत्र भारत, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के समुद्री मार्गों के केंद्र में होने के कारण अत्यंत रणनीतिक माना जाता है। इसका सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण द्वीप डिएगो गार्सिया है।
1965 में मॉरीशस की आज़ादी से ठीक पहले ब्रिटेन ने चागोस को उससे अलग कर ‘ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र’ (BIOT) घोषित कर दिया था। बाद में अमेरिका को सैन्य अड्डा बनाने के लिए 1960-70 के दशक में लगभग 2,000 स्थानीय चागोसियों को जबरन विस्थापित किया गया। मॉरीशस लंबे समय से इस क्षेत्र पर संप्रभुता का दावा करता रहा है।
2019 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने भी ब्रिटेन के कब्जे को अवैध बताया था।
2025 में हुए इस ऐतिहासिक समझौते के तहत ब्रिटेन ने आधिकारिक रूप से चागोस द्वीप समूह पर मॉरीशस की संप्रभुता को मान्यता दे दी है। हालांकि सुरक्षा कारणों से डिएगो गार्सिया स्थित ब्रिटेन-अमेरिका का संयुक्त सैन्य अड्डा कम से कम अगले 99 वर्षों तक वहीं रहेगा, जिसमें 50 साल के विस्तार का विकल्प भी शामिल है।
ब्रिटेन इस बेस के उपयोग के बदले मॉरीशस को सालाना लगभग 136 मिलियन डॉलर का किराया देगा। इसके अलावा, विस्थापित चागोसियों को डिएगो गार्सिया को छोड़कर अन्य द्वीपों पर पुनर्वास की अनुमति दी गई है।
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Ans: डिएगो गार्सिया हिंद महासागर के केंद्र में स्थित है, जहां से अमेरिका मध्य-पूर्व, अफगानिस्तान और एशिया में लंबी दूरी के सैन्य अभियान संचालित करता है। यह बेस रणनीतिक निगरानी, लॉजिस्टिक्स और शक्ति संतुलन में अहम भूमिका निभाता है।
Ans: इस समझौते में ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह पर मॉरीशस की संप्रभुता स्वीकार की, लेकिन डिएगो गार्सिया में अमेरिका-ब्रिटेन सैन्य अड्डा 99 वर्षों तक बना रहेगा, किराये और विस्तार विकल्प के साथ।
Ans: ट्रंप की चेतावनी बताती है कि अमेरिका संप्रभुता या पर्यावरण के नाम पर अपने सैन्य हितों से समझौता नहीं करेगा। जरूरत पड़ी तो वह डिएगो गार्सिया में अपनी मौजूदगी को बलपूर्वक सुरक्षित रखेगा।






