डिएगो गार्सिया बेस से हटेंगे परमाणु हथियार! मॉरीशस के उप-प्रधानमंत्री के बयान ने US-ब्रिटेन की उड़ाई नींद

Chagos Islands समझौते के तहत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण डिएगो गार्सिया बेस पर परमाणु हथियारों के स्थायी भंडारण पर प्रतिबंध लग सकता है। मॉरीशस ने कहा है कि यहां परमाणु हथियारों की तैनाती संभव नहीं है।
Storage of nuclear weapons at Diego Garcia base to be banned! Mauritius's firm stance increases tension between Britain and the US.
डिएगो गार्सिया बेस, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Diego Garcia Nuclear Weapon Ban: हिंद महासागर में स्थित ब्रिटेन और अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अड्डों में से एक, डिएगो गार्सिया, अब परमाणु हथियारों के भंडारण के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।

मॉरीशस के उप-प्रधानमंत्री पॉल बेरेंजर ने हाल ही में घोषणा की कि यदि चागोस द्वीप समूह को लेकर हुआ समझौता लागू होता है तो इस बेस पर परमाणु हथियारों को स्टोर करने पर रोक लग जाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ब्रिटेन इस द्वीप की संप्रभुता मॉरीशस को सौंपने की प्रक्रिया में है।

पेलिंडाबा संधि और 'स्टोरेज' पर पाबंदी

पॉल बेरेंजर ने इस प्रतिबंध का आधार पेलिंडाबा संधि को बताया है। मॉरीशस इस संधि का हस्ताक्षरकर्ता है, जो किसी भी सदस्य देश की जमीन पर परमाणु हथियारों के भंडारण, नियंत्रण, तैनाती या परीक्षण को प्रतिबंधित करती है। हालांकि, बेरेंजर ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि यह संधि परमाणु हथियारों की अस्थायी मौजूदगी या ट्रांजिट को नहीं रोकती लेकिन इन्हें लंबे समय तक वहां नहीं रखा जा सकेगा।

ब्रिटेन में राजनीतिक घमासान और सुरक्षा चिंताएं

मॉरीशस के इस दावे ने ब्रिटिश सरकार की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। ब्रिटेन की लेबर सरकार पहले दावा करती रही है कि समझौते के बाद भी बेस के सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इस मुद्दे पर विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी ने कड़ा रुख अपनाया है। शैडो विदेश मंत्री प्रीति पटेल ने चेतावनी दी है कि परमाणु भंडारण पर रोक से ब्रिटेन और उसके सहयोगियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि इस डील से अमेरिका असहज हो सकता है और चीन व रूस जैसे देश इसका फायदा उठा सकते हैं।

समझौते की वर्तमान स्थिति

ब्रिटेन ने मई 2025 में डिएगो गार्सिया सहित चागोस द्वीपों की संप्रभुता मॉरीशस को लौटाने के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत ब्रिटेन इस बेस को 99 साल की लीज पर अपने पास रखेगा और इसके लिए भुगतान भी करेगा। हालांकि, इस समझौते से संबंधित बिल को हाल ही में ब्रिटिश संसद से वापस लेना पड़ा है, क्योंकि डर है कि यह अमेरिका के साथ करीब 60 साल पुराने रक्षा समझौते का उल्लंघन कर सकता है।

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