नवभारत विशेष: कोरियाई लव गेम से ब्लू व्हेल तक, ऑनलाइन गेमिंग की लत लेने लगी बच्चों की जान

Dangerous Online Games: खतरनाक ऑनलाइन टास्क गेम्स बच्चों को मानसिक जाल में फंसा रहे हैं। कोरियाई लव गेम, ब्लू व्हेल जैसे गेम आत्महत्या तक ले जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर उम्र सीमा की मांग तेज हुई है।
Dangerous Online Games
प्रतीकात्मक तस्वीर (डिजाइन)
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Age Limit On Social Media: पुलिस का कहना है कि इस तरह के गेम या तो सोशल 98 मीडिया या फिर कुछ खास मोबाइल एप्स में खेले जाते हैं। अनुमान यह है कि ऐसे खेलों का संबंध डार्क वेब से है। इन गेम्स में गेम मास्टर वहीं अजनबी होता है जो खुद को कोरियाई या विदेशी नागरिक बताता है और बच्चों के साथ संपर्क में रहता है। पहले वह बच्चों से नरमी से पेश आता है और उनका भरोसा जीतने के बाद फिर उन पर सख्ती दिखाने लगता है, जब बच्चे गेम के आदी हो जाते हैं, तो वह उन पर हुकुम चलाने लगता और चैलेंज निरंतर कठिन करता रहता है। 50वें दिन खुदकुशी का चैलेंज होता है।

ब्लू व्हेल चैलेंज गेम ने भी ली कई जानें

कुछ वर्ष पहले ब्लू व्हेल चैलेंज गेम वायरल हुआ था, जब इसकी वजह से दुनियाभर से आत्महत्याओं की खबरें आने लगीं, तो इस पर अनेक देशों में प्रतिबंध लगा दिया गया। लेकिन एक बार फिर खतरनाक ऑनलाइन 'टास्क गेम्स' वापस आ रहे हैं, जिससे पैरेंट्स के दिल दहल रहे हैं? कोरियाई लव गेम, ब्लू व्हेल, ब्लैकआउट चैलेंज और सॉल्ट एंड आइस चैलेंज ऑनलाइन प्रकट हो रहे हैं। उनका संबंध चिंताजनक नतीजों से जोड़ा जा रहा है। अतः यह फिर से प्रासंगिक हो गया है कि बच्चों के लिए इंटरनेट वास्तव में कितना सुरक्षित है?

क्या है खतरनाक ऑनलाइन गेम्स से बचने के उपाय?

दरअसल, इस समस्या का समाधान यह नहीं है कि कुछ खतरनाक ऑनलाइन गेम्स पर प्रतिबंध लगा दिया जाए बल्कि यह है कि बच्चों व किशोरों की इंटरनेट तक पहुंच पर विराम लगा दिया जाए। दुनिया बच्चों के लिए सोशल मीडिया की सीमा निर्धारित कर रही है। अब समय आ गया है कि भारत भी ऐसा ही करे। हम एक उम्र का होने पर ही किसी की ड्राइविंग लाइसेंस हासिल करने की अनुमति देते हैं और इस प्रकार की समय सीमा अन्य चीजों पर भी है, जैसे शराब पीना या विवाह करना। यह आयु सीमाएं विज्ञान आधारित, विशेषकर मानव दिमाग की संरचना से संबंधित हैं। प्री-फ्रंटल कोर्टेक्स दिमाग का वह हिस्सा है, जो निर्णय, योजना, आवेग नियंत्रण व दीर्घकालीन नतीजों की समीक्षा के लिए जिम्मेदार है। यह हिस्सा बचपन या किशोरावस्था में पूर्णतः विकसित नहीं हो पाता है।

न्यूरो वैज्ञानिक शोध से मालूम होता है कि प्री-फ्रंटल कोर्टेक्स 25 साल की आयु तक पूर्णतः विकसित नहीं हो पाता है। विकास की इस समय-सारणी से स्पष्ट हो जाता है कि किशोर आवेग व्यवहार, भावनात्मक अस्थिरता और साथियों के प्रभाव का अधिक शिकार क्यों होते हैं? आज 8-10 साल के बच्चों के हाथ में मोबाइल फोन है और वह बिना रोक-टोक सोशल मीडिया को एक्सेस कर रहे हैं। यह डिजिटल लैंडस्केप इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि ध्यान आकर्षित करें, भावनात्मक कमजोरियों का शोषण करें। अब दुनियाभर की समझ में आ रहा है कि बच्चों के लिए अप्रतिबंधित सोशल मीडिया एक्सेस गंभीर समस्या है।

पिछले एक वर्ष के दौरान अनेक देशों ने इस संदर्भ में ठोस निर्णय लिए हैं। सबसे पहले पिछले साल दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया ने प्रतिबंध लगाया कि 16 बरस से कम के बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकते और लाखों नाबालिग बच्चों के एकाउंट्स टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक, स्नैपचैट, यू-ट्यूब व अन्य प्लेटफॉर्म से हटा दिए गए। अब फ्रांस की नेशनल असेंबली ने 15 साल से कम के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित किया है। अन्य यूरोपीय देश जैसे डेनमार्क, स्पेन, जर्मनी आदि भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। मलेशिया ने घोषणा की है, वह 2027 में 16 साल से कम के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा देगा, जबकि मिस्र इसे 'डिजिटल अव्यवस्था' कहते हुए इस पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है। अगर गाजियाबाद जैसी दुखद घटना को पुनः होने से रोकना है, तो वैश्विक ट्रेंड के संग चलना ही होगा।

गाजियाबाद में 3 बहनों की खुदकुशी

गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद की भारत सिटी की 9वीं मंजिल के अपने अपार्टमेंट से लगभग 2.15 बजे तीनों बहनों ने एक साथ अपने अपार्टमेंट की बाल्कनी से नीचे छलांग लगा दी। तीनों की मौत हो गई। इन लड़कियों को कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन गेमिंग की लत पड़ गई थी, जिसे वह लगभग बिना ब्रेक के खेलती थीं। उन्हें विशेषरूप से कोरियाई लव गेम की लत थी। कोरियाई लव गेम जैसे मोबाइल गेम्स में बच्चे अजनबियों से बातें करते हैं। दोस्ती की बातों से शुरू होने वाला गेम 'गेम मास्टर' के खौफनाक खेल में बदल जाता है। बच्चों को अलग-अलग टास्क दिए जाते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक आखिर में 50वें दिन होता है खुदकुशी का वैलेंज। इस दौरान बच्चों को धमकाया भी जाता है।

- लेख नरेंद्र शर्मा के द्वारा

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