ट्रंप ने रक्षा कानून NDAA पर किए हस्ताक्षर, भारत के साथ सैन्य दोस्ती होगी मजबूत, चीन पर रहेगी नजर

US India Defense: ट्रंप ने $890 बिलियन के रक्षा कानून (NDAA) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसमें भारत के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने, क्वाड को मजबूत करने और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने पर जोर दिया गया है।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वित्त वर्ष 2026 के लिए नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) को दी मंजूरी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Strengthening US India Ties: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वित्त वर्ष 2026 के लिए नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (NDAA) को मंजूरी दे दी है। यह महत्वपूर्ण रक्षा कानून वाशिंगटन की इंडो-पैसिफिक रणनीति के तहत भारत और अमेरिका के सैन्य रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। इस कानून के जरिए क्वाड देशों के साथ सुरक्षा संवाद और आपसी सहयोग को और अधिक गहरा करने का रोडमैप तैयार किया गया है। ट्रंप के अनुसार यह कानून 'ताकत के जरिए शांति' की नीति को बढ़ावा देगा और अमेरिकी रक्षा उद्योगों को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाएगा।

भारत के साथ विस्तारित सैन्य और समुद्री सहयोग

नए रक्षा कानून में भारत को अमेरिका के एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार के रूप में प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सैन्य अभ्यासों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही रक्षा व्यापार, मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को और अधिक सघन बनाया जाएगा। विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा को भारत-अमेरिका संबंधों का केंद्र बिंदु माना गया है, ताकि हिंद महासागर क्षेत्र में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

हिंद महासागर के लिए विशेष राजदूत की नियुक्ति

चीन के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव को संतुलित करने के लिए इस कानून के तहत एक 'एम्बेसडर-एट-लार्ज' (Ambassador-at-Large) के पद की स्थापना को मंजूरी दी गई है। यह विशेष राजदूत हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के साथ अमेरिका के कूटनीतिक प्रयासों का समन्वय करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य इस सामरिक क्षेत्र में कूटनीतिक पकड़ मजबूत करना और चीन की विस्तारवादी नीतियों का मुकाबला करना है। इसके साथ ही ताइवान की सुरक्षा के लिए भी 1 अरब डॉलर के फंड का प्रावधान किया गया है।

रूस और भारत के रिश्तों पर रहेगी पैनी नजर

कानून के प्रावधानों के अनुसार अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट को अगले 5 वर्षों तक कांग्रेस को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से भारत और रूस के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग की स्थिति का विश्लेषण किया जाएगा। अमेरिका यह भी जांचेगा कि रूसी सेना की गतिविधियां हिंद-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक सुरक्षा पर क्या प्रभाव डाल रही हैं। यह प्रावधान दिखाता है कि अमेरिका अपने रक्षा हितों को लेकर कितना सतर्क है और वह भारत के साथ संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

सैनिकों का कल्याण और रक्षा बजट का आवंटन

कुल 890 बिलियन डॉलर के इस विशाल रक्षा बजट में अमेरिकी सर्विस मेंबर्स के लिए 3.8 प्रतिशत वेतन वृद्धि की घोषणा की गई है। इसमें सैनिकों के आवास, स्वास्थ्य देखभाल और बच्चों की देखभाल के लिए विशेष फंडिंग का इंतजाम किया गया है। पिछले 60 वर्षों से हर साल पारित होने वाला यह कानून अमेरिका की रक्षा प्राथमिकताओं को तय करता है। इस बार भारत के साथ परमाणु और क्षेत्रीय सहयोग को औपचारिक रूप से अमेरिकी कानून का हिस्सा बनाना दोनों देशों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

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