सहारा निवेशकों के लिए खुशखबरी, कंपनी को ₹14,000 करोड़ लौटाने का आदेश; जानें आपके खाते में कब आएगा पैसा

Sahara India: सेबी का कहना है कि पैसे लौटाए जाने के कोई ठोस सबूत नहीं है। बकौल सेबी, कानूनन इतना बड़ा कैश रिफंड नहीं दिया जा सकता और शेयर में कन्वर्जन वाली बात भी संदिग्ध लगती है।
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सहारा इंडिया, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Sahara India Refund Update: सहारा इंडिया को सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल ने 14000 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने सेबी के उस फैसले को बरकरार रखा है जिसमें कंपनी को ऑप्शनली फुली कन्वर्टिबल डिबेंचर से (OFCDs) के जरिए जुटाए गए पैसों को लौटाने के लिए कहा था। सहारा ने 1998 से लेकर 2008 तक डिबेंचर्स जारी किए थे। ट्रिब्यूनल का कहना है कि इस प्रक्रिया में सिक्योरिटीज से जुड़े कानून का उल्लंघन किया गया था।

सेबी का कहना है कि अगर आप 50 या उससे ज्यादा लोगों से कोई रकम जुटाते हैं तो उसे पब्लिक इश्यू माना जाता है। इसके लिए आईपीओ लाना होता है और सेबी से अनुमति लेनी होती है। लेकिन सहारा ने ऐसा नहीं किया। वहीं, सहारा का तर्क है कि यह प्राइवेट प्लेसमेंट था और कुछ खास लोगों से ही पैसा लिया गया था।

₹14,106 करोड़ लौटाने का दावा

हालांकि, सहारा ने यह रकम 1.98 करोड़ निवेशकों से जुटाई थी। सेबी ने 31 अक्टूबर 2018 को सहारा के खिलाफ आदेश दिया। इसके बाद सहारा इंडिया कमर्शियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SICCL) ने ट्रिब्यूनल में अपील दायर कर दी। जिसका फैसला अब आया है। सहारा का कहना है कि उसने ₹14,106 करोड़ में से लगभग सब लौटा दिया है बस 17 करोड़ रुपये बचे हैं। कंपनी के अनुसार, उन्होंने ₹8,157 करोड़ कैश में लौटाए और ₹4,400 करोड़ के शेयर दे दिए हैं। इसके अलावा पैसे जुटाने में नियमों के उल्लंघन को लेकर कंपनी का कहना है कि उन्होंने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से अनुमति ली थी।

मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने क्या कहा?

सेबी का कहना है कि पैसे लौटाए जाने के कोई ठोस सबूत नहीं है। बकौल सेबी, कानूनन इतना बड़ा कैश रिफंड नहीं दिया जा सकता और शेयर में कन्वर्जन वाली बात भी संदिग्ध लगती है। साथ ही रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज वाले तर्क पर सेबी ने कहा है कि यह अनुमति उसके द्वारा बनाए गए नियमों का विकल्प नहीं है। सेबी ने सहारा पर यह आरोप भी लगाया है कि कंपनी ने निवेशकों की लिस्ट नहीं सौंपी है।

क्या है कोर्ट का फैसला?

  • 2 करोड़ लोगों से पैसा जुटाया जाए तो यह प्राइवेट कहीं से नहीं होगा। जबकि सीमा 50 लोग है।
  • सेबी के पास 1992 से अधिकार है कि वह सार्वजनिक निवेशों की जांच कर सकता है।
  • सेबी को कागजों की जांच करने में समय लगा इसलिए सहारा का 17 साल बाद कार्रवाई करने वाला आरोप भी गलत है।

इससे आम आदमी को क्या फायदा?

सहारा जब ये पैसा सेबी को लौटा देगा तो नियामक इस रकम का इस्तेमाल निवेशकों को वापस लौटाने के लिए करेगा। हालांकि, पैसा केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जो अपनी पहचान और निवेश के सबूत दे पाएंगे। अभी यहां सहारा के पास एक विकल्प है कि वह सुप्रीम कोर्ट चला जाए और वहां से इस आदेश पर स्टे लग जाए।

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