सऊदी का साथ पाकिस्तान को पड़ेगा भारी! जानें कैसे ईरान का 'तालिबान कार्ड' बिगाड़ेगा शहबाज का खेल

Pakistan Saudi Defense Deal: सऊदी अरब के साथ डिफेंस डील करना पाकिस्तान के लिए नई मुसीबत बन सकता है। ईरान अब तालिबान को मान्यता देकर पाकिस्तान को कूटनीतिक रूप से घेरने की बड़ी तैयारी में है।
Saudi Arabia's support will prove costly for Pakistan! Learn how Iran's 'Taliban card' will spoil Shahbaz's game
ईरान-सऊदी दुश्मनी की आग में फंसा पाकिस्तान, (डिजाइन फोटो)
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Pakistan Iran News Hindi: साल 2025 के आखिर में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुई एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते ने दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस करार के तहत पाकिस्तान ने साफ किया है कि यदि किसी देश द्वारा सऊदी अरब पर हमला किया जाता है, तो उसे पाकिस्तान पर हमला समझा जाएगा और वह इसका जवाब देगा।

हालांकि, यह समझौता अब पाकिस्तान के लिए परेशानी का कारण बनता नजर आ रहा है, क्योंकि उसका पड़ोसी देश ईरान इसे अपने खिलाफ एक संभावित खतरे के रूप में देख रहा है।

ईरान का 'तालिबान दांव'

ईरान ने पाकिस्तान को कूटनीतिक सबक सिखाने के लिए अब 'तालिबान कार्ड' खेलने का मन बना लिया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ईरान जल्द ही अफगानिस्तान के तालिबान शासन को आधिकारिक मान्यता देने की घोषणा कर सकता है। काबुल में तेहरान के राजदूत अली रजा बेकदली ने संकेत दिया है कि इस संबंध में बातचीत अंतिम चरण में है और दोनों देशों ने राजनयिक संबंध स्थापित कर लिए हैं। यदि ऐसा होता है, तो रूस के बाद ईरान तालिबान को मान्यता देने वाला दूसरा बड़ा देश बन जाएगा।

पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा झटका क्यों है?

तालिबान को ईरान की मान्यता मिलना पाकिस्तान के लिए कई मायनों में नुकसानदेह है। सबसे बड़ी वजह यह है कि पाकिस्तान खुद तालिबान शासन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मोर्चा खोले हुए है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हाल ही में कहा था कि तालिबान की वजह से अफगानिस्तान 2001 के उस दौर में वापस चला गया है जब वहां अलकायदा का प्रभाव था। वहीं,  पाकिस्तान का सीधा आरोप है कि उसके देश में होने वाले आतंकी हमलों, विशेषकर 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) की गतिविधियों को काबुल से समर्थन मिलता है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में पाकिस्तान के भीतर 700 से अधिक आतंकी हमले हुए, जिनके लिए उसने अफगानिस्तान की धरती के इस्तेमाल को जिम्मेदार ठहराया है। ऐसे में ईरान द्वारा तालिबान को मान्यता देने से पाकिस्तान की सुरक्षा लड़ाई कमजोर पड़ सकती है।

सऊदी-ईरान के बीच पाकिस्तान की भूमिका

ईरान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से तेल व्यापार और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर Proxy War चलता रहा है। अमेरिका के साथ ईरान के हालिया तनाव ने इस स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। ईरान का मानना है कि सऊदी अरब अमेरिका का करीबी सहयोगी है और वह ईरान पर सैन्य कार्रवाई का पक्षधर है।

इस माहौल में पाकिस्तान और सऊदी की डिफेंस डील ईरान के लिए सिरदर्द बन गई है क्योंकि यह सीधे तौर पर ईरान की सैन्य योजनाओं को प्रभावित करती है। मान्यता मिलने के बाद ईरान में तालिबान का दूतावास खुल सकेगा और दोनों देशों के बीच आधिकारिक व्यापारिक समझौते हो सकेंगे, जिससे तालिबान की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता बढ़ेगी। यह स्थिति पाकिस्तान को क्षेत्रीय राजनीति में अलग-थलग कर सकती है।

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