'सिर्फ भारत ही बचा सकता है', पड़ोसी देशों में उथल-पुथल के बीच श्रीलंका के सांसद का बड़ा बयान

Namal Rajapaksa Statement: दक्षिण एशिया में राजनीतिक अस्थिरता और चरमपंथी खतरों के बीच श्रीलंका के सांसद नामल राजपक्षे ने भारत की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया है।
'Only India can save us', says Sri Lankan MP amid turmoil in neighboring countries.
श्रीलंका के सांसद नामल राजपक्षे, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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World News In Hindi: दक्षिण एशिया के बदलते राजनीतिक समीकरणों और पड़ोसी देशों में मची उथल-पुथल के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के बेटे और सांसद नामल राजपक्षे ने क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए भारत के नेतृत्व का पुरजोर समर्थन किया है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए कहा कि हालिया वैश्विक सुरक्षा घटनाक्रमों को देखते हुए दक्षिण एशिया में एक मजबूत क्षेत्रीय सहयोग की तत्काल आवश्यकता है, जिसमें भारत एक केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।

तीन देशों में अस्थिरता का एक जैसा पैटर्न

नामल राजपक्षे ने अपनी पोस्ट में दक्षिण एशिया के तीन प्रमुख देशों श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल में हुई हालिया घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इन तीनों देशों में सत्ता परिवर्तन का एक समान पैटर्न देखने को मिला है। इसकी शुरुआत 2022 में श्रीलंका से हुई जहां आर्थिक संकट के कारण हुए जन आंदोलन ने तत्कालीन राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे को सत्ता छोड़ने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद 2024 में बांग्लादेश में हिंसक छात्र आंदोलनों के कारण शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देकर भारत में शरण लेनी पड़ी। वहीं, 2025 में नेपाल में 'जेन-जी' (Gen-Z) के आंदोलन और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शनों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और राष्ट्रपति को इस्तीफा देने पर मजबूर किया।

चरमपंथ और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता

राजपक्षे ने संकेत दिया कि इन जन आंदोलनों के पीछे कुछ हद तक चरमपंथी तत्वों का हाथ हो सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र के देशों को मिलकर चरमपंथ का मुकाबला करने, राजनीतिक हिंसा को रोकने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक 'सामूहिक प्रतिबद्धता' दिखानी होगी। उनके अनुसार, दक्षिण एशिया को साझा चुनौतियों का जवाब देने के लिए और अधिक क्षेत्रीय एकजुटता की जरूरत है।

भारत को लेकर राजपक्षे ने क्या कहा?

भारत की भूमिका को रेखांकित करते हुए राजपक्षे ने कहा कि क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति बनाए रखने के लिए भारत का नेतृत्व बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 2022 के संकट के दौरान भारत ने श्रीलंका को वित्तीय मदद और क्रेडिट लाइन देकर संभाला था।

इसके अलावा, चक्रवात दित्वाह के बाद भारत ने 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' की भूमिका निभाते हुए खोज और बचाव अभियान चलाए और श्रीलंका के पुनर्निर्माण के लिए 45 करोड़ डॉलर के सहायता पैकेज की घोषणा की।

लोकतंत्र की बहाली की उम्मीद नामल राजपक्षे का मानना है कि बांग्लादेश और नेपाल में होने वाले आगामी चुनाव लोकतांत्रिक वैधता को फिर से स्थापित करने का एक बड़ा मौका हैं। उन्होंने कहा कि ये चुनाव न केवल इन देशों के लिए बल्कि पूरी क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

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