
विदेश मंत्री एस. जयशंकर (सोर्स-सोशल मीडिया)
S. Jaishankar Statement on Venezuela Crisis: भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने लक्जमबर्ग दौरे के दौरान वेनेजुएला में चल रहे गंभीर संकट पर भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद उपजी स्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की।
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि वेनेजुएला के लोगों की सुरक्षा और भलाई ही इस समय अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। भारत इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है और चाहता है कि विवाद का समाधान कूटनीतिक बातचीत के जरिए ही निकाला जाए।
विदेश मंत्री ने याद दिलाया कि वेनेजुएला के साथ भारत के संबंध हमेशा से घनिष्ठ और ऐतिहासिक रहे हैं, जो तेल और ऊर्जा व्यापार पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि वहां के नागरिक इस कठिन समय से जल्द बाहर निकलें और देश दोबारा विकास की पटरी पर लौटे। भारत की चिंता का मुख्य केंद्र वहां रह रहे आम लोगों का कल्याण है, जो इस भू-राजनीतिक टकराव के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
#WATCH | Luxembourg: On the US attacking Venezuela and capturing its president, External Affairs Minister, Dr S Jaishankar says, “I think we put out a statement yesterday, so I would urge you to look at it… We are concerned about the developments, but we would really urge all… pic.twitter.com/Sd55rvA6Gm — ANI (@ANI) January 7, 2026
जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति की वास्तविकता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज के समय में देश केवल अपने स्वार्थ के आधार पर निर्णय लेते हैं। उन्होंने अन्य देशों की ‘मुफ्त सलाह’ और दोहरे चरित्र की आलोचना की, जहां लोग दूसरों को शांति का उपदेश देते हैं लेकिन अपने क्षेत्र की हिंसा पर चुप रहते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत दुनिया के इस स्वभाव को समझता है और अपनी विदेश नीति को राष्ट्रीय हितों के अनुरूप ही संचालित करता रहेगा।
#WATCH | Luxembourg: External Affairs Minister, Dr S Jaishankar says, “… In this day and age, countries will do things only if it is of direct benefit to them. They’ll offer you free advice. If something happens, they’ll say, please don’t do that. It worries us if there is… pic.twitter.com/I0T6N1fALK — ANI (@ANI) January 7, 2026
वेनेजुएला में यह अशांति 3 जनवरी को अमेरिकी सेना द्वारा काराकास में किए गए अचानक सैन्य हमले और निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मादुरो पर नार्को-टेररिज्म के गंभीर आरोप लगाते हुए इस कार्रवाई को अंजाम दिया, जिसके बाद मादुरो को अमेरिका की ब्रुकलिन जेल ले जाया गया है। इस घटना ने पूरे दक्षिण अमेरिका में तनाव बढ़ा दिया है और वैश्विक तेल बाजार में भी अनिश्चितता की स्थिति पैदा कर दी है।
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जयशंकर के बयान से यह साफ है कि भारत किसी भी पक्ष का अंधा समर्थन करने के बजाय लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय सुरक्षा के पक्ष में खड़ा है। उन्होंने आह्वान किया कि संबंधित पक्षों को एक मेज पर बैठकर ऐसा रास्ता निकालना चाहिए जिससे वेनेजुएला में स्थिरता बहाल हो सके। भारत के लिए वेनेजुएला एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है, इसलिए वहां की शांति भारत के आर्थिक हितों के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।
Ans: उन्होंने कहा कि भारत वेनेजुएला के घटनाक्रम से चिंतित है और चाहता है कि वहां के लोगों के कल्याण के लिए बातचीत से शांतिपूर्ण हल निकाला जाए।
Ans: भारत और वेनेजुएला के बीच दशकों से घनिष्ठ संबंध रहे हैं, जिनमें कच्चा तेल (Crude Oil) का व्यापार सबसे महत्वपूर्ण कड़ी रहा है।
Ans: भारत ने सीधे तौर पर किसी पक्ष की निंदा करने के बजाय कूटनीति और लोगों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया है।
Ans: यह संकट 3 जनवरी 2026 को अमेरिकी सेना द्वारा काराकास पर हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद शुरू हुआ।






