
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने माफी मांगी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Oxford University Apologises: अमेरिकी लेखक जेम्स विलियम लेन से जुड़े बहुचर्चित विवादित मामले में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया है। छत्रपति शिवाजी महाराज और राजमाता जिजाऊ की कथित मानहानि से संबंधित इस प्रकरण में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस (OUP) ने औपचारिक रूप से माफी मांग ली है। इस माफीनामे को बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल किया गया है।
इसके अलावा ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस लगभग 20 साल बाद सतारा लोकसभा क्षेत्र से सांसद श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले को व्यक्तिगत रूप से पत्र भी भेजा गया है। यह मामला वर्ष 2003 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया द्वारा प्रकाशित जेम्स विलियम लेन की पुस्तक ‘शिवाजी: हिंदू किंग इन इस्लामिक इंडिया’ से जुड़ा है। आरोप था कि पुस्तक के कुछ अध्यायों और अंशों में छत्रपति शिवाजी महाराज और उनकी माता राजमाता जिजाऊ के संबंध में आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां की गई थीं।
प्रकाशित होने के बाद से ही किताब विवादों में रही। खासकर भारत में इसने करोड़ों लोगों की धार्मिक और ऐतिहासिक भावनाओं को ठेस पहुंची। इसी के विरोध में वर्ष 2004 में सतारा की माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में आपराधिक मामला संख्या 3230/2004 के तहत निजी शिकायत दर्ज की गई थी।
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मामले की सुनवाई के बाद 2 अप्रैल 2005 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सतारा ने आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया। इसके बाद बचाव पक्ष ने बॉम्बे हाईकोर्ट में आपराधिक रिट याचिकाएं दाखिल कीं। इन याचिकाओं में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस इंडिया के संपादक सैयद मंजर खान, संस्कृत प्रोफेसर डॉ. श्रीकांत बहुलेकर, प्रोफेसर सुचेता परांजपे और भंडारकर संस्थान के लाइब्रेरियन वी. एल. मंजुल शामिल थे।
ये याचिकाएं 17 दिसंबर 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट की कोल्हापुर सर्किट बेंच में न्यायमूर्ति शिवकुमार एस. दिगे के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हुई। सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि वे शिकायतकर्ता श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले से बिना शर्त माफी मांगने को तैयार हैं और यह माफी राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों में प्रकाशित की जाएगी।
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शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील शैलेश धनंजय चव्हाण, रणजीत पाटिल, सुजीत निकम और धवलसिंह पाटिल ने पक्ष रखा। इसके बाद हाईकोर्ट ने आरोपियों को 15 दिनों के भीतर राष्ट्रीय अखबारों में सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने का निर्देश दिया।
माफीनामे में यह स्वीकार किया गया कि छत्रपति शिवाजी महाराज करोड़ों लोगों के लिए श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक हैं तथा पुस्तक के कारण यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो उसके लिए गहरा खेद व्यक्त किया गया है। साथ ही श्रीमंत छत्रपति उदयनराजे भोसले से बिना शर्त क्षमा याचना की गई है।






