
ईरान को लेकर ट्रंप का रूख, (एआई डिजाइन फोटो)
Donald Trump Iran News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर सख्त रवैया अब नरम पड़ता दिख रहा है। CIA की एक खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में वर्तमान सरकार को उखाड़ फेंकने की ताकत नहीं है जिसके बाद ट्रंप प्रशासन ने अपनी रणनीति और बयानबाजी दोनों में बदलाव किया है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, CIA की एक खुफिया रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ईरान में फिलहाल तख्तापलट की कोई संभावना नहीं है। खुफिया एजेंसी का मानना है कि वर्तमान विरोध प्रदर्शनों में इतनी ऊर्जा और शक्ति नहीं है कि वे खामेनेई सरकार को सत्ता से बेदखल कर सकें। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि हालिया शुक्रवार को हुए प्रदर्शनों ने सीआईए अधिकारियों को फिर से सतर्क कर दिया है।
इस खुफिया रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लहजे में बड़ा बदलाव देखा गया है। एक हालिया इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान के पूर्व युवराज रेजा पहेलवी से मुलाकात करने से इनकार कर दिया। ट्रंप ने कहा कि हालांकि पहेलवी एक अच्छे इंसान हैं लेकिन वे बतौर राष्ट्रपति उनसे अभी नहीं मिल सकते। ट्रंप का मानना है कि अभी किसी एक व्यक्ति का समर्थन करना जल्दबाजी होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इंतजार करना चाहते हैं कि भविष्य में ईरान के भीतर से कौन सा नेता उभरकर सामने आता है। बता दें कि रेजा पहेलवी, ईरान के अंतिम शाह के बेटे हैं और फिलहाल अमेरिका में रहकर वीडियो के जरिए लोगों से प्रदर्शन की अपील कर रहे हैं।
ईरान में प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों पर भी ट्रंप ने अपनी टिप्पणी में संशोधन किया है। ट्रंप ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों में हुई 30 मौतों के लिए पूरी तरह सरकार को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है। उनके अनुसार, इनमें से कुछ मौतें भीड़ के अनियंत्रित हो जाने के कारण हुई हैं।
ईरान में महंगाई और सरकार विरोधी प्रदर्शनों पर नजर रखने के लिए अमेरिकी एजेंसी सीआईए के साथ-साथ इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद भी सक्रिय है। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्होंने सीआईए और मोसाद से जुड़े 10 से ज्यादा एजेंटों को गिरफ्तार किया है।
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दूसरी ओर, ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को अमेरिका और इजरायल की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है। खामेनेई का दावा है कि देश के 9 करोड़ लोग उनके साथ हैं और सड़कों पर उतरने वाले मुट्ठी भर लोग केवल अमेरिका को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं।






