
चीन में सेना और सरकार के बीच तनाव (सोर्स- सोशल मीडिया)
Military coup in China: चीन की राजधानी बीजिंग और उसके आसपास के इलाकों में बीते कुछ दिनों से असामान्य सैन्य गतिविधियों और कड़े सुरक्षा इंतज़ामों की खबरें सामने आ रही हैं। भारतीय खुफिया एजेंसियों के इनपुट और चीनी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि सेना की आवाजाही और सतर्कता अचानक बढ़ा दी गई है। इससे चीन के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के भीतर संभावित अंदरूनी अस्थिरता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की कुछ चुनिंदा यूनिट्स को फर्स्ट-लेवल कॉम्बैट रेडीनेस पर रखा गया है। आमतौर पर यह स्थिति तब लागू की जाती है, जब किसी बड़े खतरे या गंभीर आंतरिक सुरक्षा चिंता की आशंका हो। हालांकि, इस संबंध में चीनी सरकार या सेना की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
26 जनवरी की तारीख वाले कुछ वीडियो चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म वीचैट और वीबो पर वायरल हुए हैं। इन वीडियो में सैन्य वाहन और काफिले तियानजिन के वुकिंग जिले से गुजरते दिख रहे हैं, जो बीजिंग से लगभग 40-50 किलोमीटर दूर स्थित है। इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन इनसे चर्चाओं को जरूर बल मिला है।
इसके साथ ही राजधानी के संवेदनशील इलाकों में पीपुल्स आर्म्ड पुलिस की विशेष इकाइयों, खासकर एलिट तेजिंग दस्तों की तैनाती बढ़ाए जाने की भी खबरें हैं। कुछ अपुष्ट रिपोर्टों में मेट्रो सेवाओं के आंशिक रूप से बंद होने, सैन्य परिसरों को सील किए जाने और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की आवाजाही व संचार पर अस्थायी रोक की बातें भी सामने आई हैं।
इन घटनाक्रमों की पृष्ठभूमि में चीनी सेना के भीतर चल रहा व्यापक शुद्धिकरण अभियान अहम माना जा रहा है। 24 जनवरी को चीन के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि पीएलए के कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच चल रही है, जिनमें शीर्ष स्तर के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके बाद से सेना के भीतर हलचल की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, बीजिंग के आसपास सुरक्षा बढ़ाए जाने के पीछे सेना के भीतर गुटबाजी, असंतोष या नेतृत्व को लेकर अंदरूनी खींचतान की आशंका हो सकती है। कुछ विश्लेषक इसे राष्ट्रपति शी जिनपिंग और सेना के कुछ वर्गों के बीच लंबे समय से चले आ रहे अविश्वास से भी जोड़कर देख रहे हैं। सत्ता के उत्तराधिकार को लेकर संवेदनशीलता भी एक संभावित कारण मानी जा रही है।
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फिलहाल चीन में किसी तख्तापलट या खुले संघर्ष के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। चीनी सरकारी मीडिया और आधिकारिक चैनल इस पूरे घटनाक्रम पर लगभग चुप हैं, जिसे विशेषज्ञ राजनीतिक रूप से संवेदनशील परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली सामान्य रणनीति बताते हैं।
Ans: बीजिंग और आस-पास के इलाकों में सेना की आवाजाही बढ़ी और सुरक्षा कड़ी हुई। भारतीय खुफिया एजेंसियों और सोशल मीडिया वीडियो के अनुसार यह आंतरिक सुरक्षा या नेतृत्व अस्थिरता की आशंका से जुड़ी हो सकती है।
Ans: PLA यूनिट्स को फर्स्ट-लेवल कॉम्बैट रेडीनेस पर रखा गया है। यह स्थिति गंभीर खतरे या आंतरिक सुरक्षा चिंताओं के समय लागू होती है। आधिकारिक बयान अभी तक नहीं आया है।
Ans: वीचैट और वीबो पर वायरल वीडियो में सैन्य वाहन और काफिले दिखे। मेट्रो सेवाओं पर रोक, सैन्य परिसरों की सीलिंग और वरिष्ठ अधिकारियों की आवाजाही पर प्रतिबंध जैसी रिपोर्टें भी सामने आई हैं।
Ans: PLA में शुद्धिकरण अभियान चल रहा है। 24 जनवरी को रक्षा मंत्रालय ने कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच की पुष्टि की। इससे सेना में हलचल और गुटबाजी की चर्चाएँ तेज हुई हैं।
Ans: फिलहाल तख्तापलट या खुले संघर्ष के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। सरकारी मीडिया चुप है, जो राजनीतिक रूप से संवेदनशील परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली सामान्य रणनीति मानी जाती है।






