
बांग्लादेश में चुनाव प्रचार करते तारिक रहमान, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh News In Hindi: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरपर्सन तारिक रहमान करीब 17 साल के लंबे निर्वासन के बाद आखिरकार अपने देश लौट आए हैं। उनकी यह वापसी ऐसे संवेदनशील समय पर हुई है, जब हाल ही में उनकी मां और देश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हुआ है। इस व्यक्तिगत दुख के बावजूद तारिक रहमान पूरी ऊर्जा के साथ चुनावी मैदान में उतर चुके हैं और लगातार जनसभाएं व प्रचार अभियान चला रहे हैं।
हालांकि, आने वाले आम चुनाव में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती बाहरी राजनीतिक विरोधियों से ज्यादा अपनी ही पार्टी के भीतर उठ रही असंतोष और गुटबाजी है। पार्टी के कुछ वरिष्ठ और स्थानीय नेता उनके नेतृत्व से असहमत नजर आ रहे हैं, जिससे अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश की 79 सीटों पर BNP के नेता पार्टी के आधिकारिक फैसलों के खिलाफ निर्दलीय या ‘बागी’ उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें से कम से कम 46 सीटों पर ये बागी उम्मीदवार काफी मजबूत स्थिति में हैं जो आधिकारिक उम्मीदवारों की जीत की संभावनाओं को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा सकते हैं। शुरुआत में 117 चुनाव क्षेत्रों में 190 नेताओं ने नामांकन दाखिल किया था लेकिन पार्टी के दबाव के बाद भी 79 क्षेत्रों में 92 नेताओं ने अपनी उम्मीदवारी वापस नहीं ली है।
राजनीतिक विश्लेषकों और स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स (प्रथम आलो) के अनुसार, कई सीटों पर BNP के वोट बंटने का सीधा लाभ जमात-ए-इस्लामी और उसके समर्थित उम्मीदवारों को मिल सकता है।
यह स्थिति BNP की संगठनात्मक कमजोरी को भी दर्शाती है जहां पार्टी अपने नेताओं को अनुशासित करने में विफल रही है। हालांकि पार्टी ने बागी उम्मीदवारों और उनके पक्ष में काम करने वाली स्थानीय कमेटियों के खिलाफ निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई की है लेकिन विद्रोह थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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बांग्लादेश की 300 सीटों पर 12 फरवरी को मतदान होना है। इस चुनाव में BNP ने 291 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं जबकि 8 सीटें अपने गठबंधन सहयोगियों को दी हैं। कोमिला-4 सीट पर तकनीकी कारणों से पार्टी का कोई उम्मीदवार नहीं है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि कई नेताओं को लगता था कि नामांकन मिलने से उनके संघर्ष को पहचान मिलेगी लेकिन एक सीट पर एक ही उम्मीदवार देना संभव था, जिससे उपजी नाराजगी अब बगावत के रूप में सामने आ रही है।






