घटस्थापना के साथ शुरू हुआ सप्तश्रृंगी का चैत्र नवरात्रि पर्व का भव्य शुभारंभ, गढ़ पर भक्तों की भीड़

Nashik Saptashrungi Temple Festival: नासिक के प्रसिद्ध शक्तिपीठ सप्तश्रृंगी गढ़ पर चैत्र नवरात्रि उत्सव की शुरुआत हो गई है। घटस्थापना के साथ नौ दिनों तक विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
The grand commencement of the Saptashrungi Chaitra Navratri festival took place with Ghatasthapana, drawing crowds of devotees to the fort.
Nashik Chaitra Navratri ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Published on
Updated on

Nashik Chaitra Navratri: नासिक उत्तर महाराष्ट्र के आराध्य दैवत और प्रसिद्ध शक्तिपीठ सप्तश्रृंगी गढ़ पर आज से चैत्र नवरात्रि उत्सव और वार्षिक चैत्र मेले का भव्य शुभारंभ हो गया है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा के पाचन मुहूर्त पर गुरुवार, 19 मार्च 2026 को सुबह मंदिर संस्थान द्वारा विधि-विधान से घटस्थापना की जाएगी।

शक्ति और परंपरा का संगम

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवी भगवती ने इसी स्थान पर महिषासुर का वध किया था। वणी के पास सात पहाड़ियों के बीच स्थित होने के कारण माता को 'सप्तश्रृंगी' कहा जाता है।

माता की अठारह भुजाओं वाली विशाल प्रतिमा की जीवंतता भक्तों को अपनी ओर खींच लेती है। उत्सव की मुख्य तिथियां और आकर्षण: नौ दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे।

19 मार्च (प्रतिपदा): सुबह 7:00 से 9:00 बजे के बीच 'घटस्थापना' और ध्वज पूजन। 23 मार्च (पंचमी): माता का स्वर्ण आभूषणों से भव्य 'अलंकार पूजन' और विशेष श्रृंगार।

25 मार्च (सप्तमी/अष्टमी): रात्रि में 'होम-हवन' और महानिशा पूजा का आयोजन। 27 मार्च (चैत्र पूर्णिमा): उत्सव का मुख्य दिन। दोपहर में गढ़ के दुर्गम शिखर पर 'विजय ध्वज' फहराया जाएगा और विशाल पालकी यात्रा निकाली जाएगी।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं

प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने भारी भीड़ को देखते हुए व्यापक प्रबंध किए हैं-सुगम दर्शनः कतारों को छोटा करने के लिए 'दर्शन पास' की ऑनलाइन व्यवस्था की गई है।

परिवहनः नांदूरी (तलहटी) से गढ़ तक पहुँचने के लिए MSRTC की विशेष शटल बसें हर 5-10 मिनट में उपलब्ध रहेंगी। फ्यूनिकुलर रोपवेः बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए रोपवे सेवा सुबह 6:00 से रात 9:00 बजे तक निरंतर चलेगी। सुरक्षाः पूरे परिसर में प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह वर्जित (Ban) किया गया है।

प्रतिदिन का नियमित कार्यक्रम

भक्तों की सुविधा के लिए आरती और दर्शन का समय इस प्रकार रहेगा, प्रातः 5:00 बजे: काकड़ आरती (दिन की पहली मंगल आरती)। प्रातः 8:30 बजे महापूजा एवं पंचामृत अभिषेक, दोपहर 12:00 बजे: मध्याहन आरती और भीग अर्पण, शाम 7:00 बजे: धूप आरती और दीप प्रज्ज्वलन।

रात्रि 10:00 बजे शेज आरती (अंतिम आरती और कपाट बंद)। ऐतिहासिक रूप से पेशवा काल से ही इस शक्तिपीठ का विशेष महत्व रहा है।

आज भी स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाएं आने वाले लाखों भक्तों के लिए नि: शुल्क भोजन और जल की व्यवस्था कर हमारी सेवा परंपरा को जीवित रखे हुए है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com