बांग्लादेश चुनाव से पहले ढाका में हिंसक प्रदर्शन, उस्मान हादी की हत्या की UN जांच की मांग

Osman Hadi Murder: ढाका में छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या की UN जांच की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुए, जिसमें 50 से अधिक लोग घायल हुए। चुनाव से पहले ये हालात अंतरिम सरकार के लिए बड़ी चुनौती हैं।
Dhaka Protests: 50 Injured as Demands for UN Probe into Osman Hadi Murder Turn Violent
बांग्लादेश चुनाव से पहले ढाका में हिंसक प्रदर्शन (सोर्स-सोशल मीडिया)
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UN Investigation Into Hadi Murder: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 12 फरवरी को होने वाले संसदीय चुनावों से पहले माहौल बेहद तनावपूर्ण और अस्थिर हो गया है। हजारों प्रदर्शनकारी छात्र नेता उस्मान हादी की मौत के इंसाफ के लिए सड़कों पर उतर आए हैं और हादी हत्याकांड की जांच की मांग कर रहे हैं। शुक्रवार को इंकलाब मंच के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन ने अचानक हिंसक रूप ले लिया जिससे पूरी राजधानी रणभूमि में तब्दील हो गई। इस संघर्ष में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई तीखी झड़पों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ढाका में हिंसा

राजधानी की सड़कों पर शुक्रवार को भारी हंगामा तब शुरू हुआ जब प्रदर्शनकारियों ने शाहबाग से मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के सरकारी आवास की ओर मार्च करना शुरू किया। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोलों के साथ वाटर कैनन और साउंड ग्रेनेड का भी इस्तेमाल किया जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस भीषण झड़प में लगभग 40 से 50 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें इलाज के लिए तत्काल ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाना पड़ा है।

उस्मान हादी विवाद

उस्मान हादी एक प्रमुख छात्र नेता और चुनावी उम्मीदवार थे जिन्होंने साल 2024 के जुलाई विद्रोह में शेख हसीना सरकार को सत्ता से हटाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्हें 12 दिसंबर 2025 को चुनाव प्रचार के दौरान गोली मारी गई थी जिसके बाद सिंगापुर में इलाज के दौरान 18 दिसंबर को उनकी दर्दनाक मौत हो गई थी। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट आरोप है कि वर्तमान अंतरिम सरकार इस हत्या की निष्पक्ष जांच के रास्ते में बड़ी बाधा उत्पन्न कर रही है और वे न्याय चाहते हैं।

सरकार का रुख

मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने इस संबंध में बयान जारी कर कहा है कि वह हादी की हत्या की संयुक्त राष्ट्र के OHCHR द्वारा जांच कराने के कानूनी पहलुओं की समीक्षा कर रही है। मुख्य सलाहकार के कार्यालय ने दावा किया है कि विरोध के दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए गोलियां नहीं चलाईं बल्कि केवल बचाव के उपाय अपनाए थे। सरकार ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में भारी सुरक्षा बलों और बीजीबी यानी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश की तैनाती को बढ़ा दिया है।

चुनावी अनिश्चितता

संसदीय चुनाव से महज छह दिन पहले भड़की इस व्यापक हिंसा ने अंतरिम सरकार के सामने एक बहुत बड़ा प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी सिरदर्द और संकट खड़ा कर दिया है। ढाका के प्रमुख चौराहों जैसे बंगला मोटर और शाहबाग में ट्रैफिक घंटों तक पूरी तरह ठप रहा जिससे आम जनता और VIP आवाजाही को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों को अब यह आशंका है कि आने वाले कुछ दिनों में उकसावे की किसी भी छोटी घटना से देश का तनावपूर्ण माहौल और अधिक भड़क सकता है।

नई राजनीतिक हलचल

इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रमेश चंद्र सेन की जेल में मौत की खबर ने बांग्लादेश की राजनीतिक सरगर्मी को और भी बढ़ा दिया है। रमेश चंद्र सेन शेख हसीना के पदच्युत होने के बाद से ही हिरासत में बंद थे और उनकी मृत्यु ने जेलों में बंद राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना ने चुनाव से ठीक पहले देश में पहले से मौजूद अस्थिरता को और अधिक गंभीर और भविष्य के लिए चिंताजनक बना दिया है।

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