नमाज पढ़ने निकले थे और लाश घर लौटी, शेख हसीना की अवामी लीग के 2 नेताओं की मौत से हड़कंप

Bangladesh Political Crisis: बांग्लादेश में शेख हसीना की पार्टी के नेता अगस्त, 2024 से ही निशाने पर रहे हैं। अगस्त, 2024 में प्रदर्शनों के बीच शेख हसीना की सरकार गिर गई थी।
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सांकेतिक तस्वीर (Image- Social Media)
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Bangladesh Elections: बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग से जुड़े दो नेताओं की अलग-अलग जिलों में मौत की खबर सामने आई है। एक नेता की मौत जेल में न्यायिक हिरासत के दौरान हुई, जबकि दूसरे मामले में एक छात्र नेता की कथित तौर पर अगवा कर हत्या कर दी गई। इन घटनाओं के बाद मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पर राजनीतिक दमन और लक्षित हिंसा के आरोप फिर से तेज हो गए हैं। यह घटनाएं चटगांव और नरसिंदी जिलों में हुई हैं, जिनकी जानकारी पार्टी सूत्रों और मृतकों के परिजनों ने दी है।

चटगांव में अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और चटगांव सिटी अवामी लीग की वार्ड नंबर-24 (नॉर्थ अग्राबाद) इकाई के उपाध्यक्ष अब्दुर रहमान मिया (70) की जेल में मौत हो गई। उन्हें करीब तीन महीने पहले हिरासत में लिया गया था। परिवार का आरोप है कि फेफड़ों के कैंसर समेत गंभीर बीमारियों से पीड़ित होने के बावजूद उन्हें जमानत और समुचित इलाज नहीं दिया गया।

नमाज के लिए जाते वक्त हुई गिरफ्तारी

बांग्लादेश के प्रमुख मीडिया संस्थान द डेली रिपब्लिक के मुताबिक, अब्दुर रहमान मिया को 17 नवंबर 2025 को उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब वे नमाज अदा करने के लिए घर से निकल रहे थे। परिजनों का कहना है कि उस वक्त उनकी हालत बेहद खराब थी और वे ठीक से चल पाने में भी असमर्थ थे। पुलिस ने उन्हें कोतवाली थाना क्षेत्र में दर्ज एक मामले में हिरासत में लिया था, जिसमें कथित तौर पर विस्फोटकों से जुड़े आरोप थे। परिवार का दावा है कि गिरफ्तारी के समय मिया को सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो रही थी और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने की जरूरत थी, लेकिन उनकी अपीलों पर ध्यान नहीं दिया गया।

जेल में नहीं मिला इलाज

करीब तीन महीने तक हिरासत में रहने के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और अंततः जेल में ही उनकी मौत हो गई। अवामी लीग नेताओं ने आरोप लगाया है कि जमानत और चिकित्सा सुविधा से वंचित रखा जाना हिरासत में लापरवाही का गंभीर मामला है। फिलहाल अधिकारियों की ओर से उनकी मौत को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। दूसरी घटना नरसिंदी जिले से सामने आई है, जहां अवामी लीग की छात्र इकाई छत्र लीग के पूर्व नेता अजीमुल कादेर भुइयां (45) का क्षत-विक्षत शव एक खाई से बरामद किया गया। वे पिछले तीन दिनों से लापता थे। अजीमुल पेशे से पोल्ट्री व्यवसायी थे और बेलाबो उपजिला के बाजनाब यूनियन स्थित बीर बागबेर गांव के रहने वाले थे। वे दिवंगत मन्नान भुइयां के पुत्र थे।

जमात-ए-इस्लामी पर संदेह

अजीमुल यूनियन छत्र लीग के महासचिव और उपजिला इकाई के संयुक्त महासचिव रह चुके थे। उन्हें एक जमीनी स्तर का संगठनकर्ता माना जाता था, न कि कोई बड़ा राजनीतिक चेहरा। उनके लापता होने और फिर हत्या की खबर से अवामी लीग समर्थकों में भारी आक्रोश फैल गया है। पार्टी का आरोप है कि यह हत्या राजनीतिक कारणों से की गई।

अवामी लीग नेताओं ने दावा किया है कि इस हत्या में जमात-ए-इस्लामी से जुड़े कार्यकर्ताओं की भूमिका हो सकती है। साथ ही उन्होंने अंतरिम प्रशासन पर आरोपियों को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया है। हालांकि कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अभी तक किसी राजनीतिक साजिश की पुष्टि नहीं की है और कहा है कि मामले की जांच जारी है।

अवामी लीग की बढ़ती चिंताएं

इन दोनों मौतों के बाद सरकार बदलने के बाद से अवामी लीग समर्थकों के खिलाफ कथित मनमानी गिरफ्तारियों, हिरासत में मौतों और लक्षित हमलों को लेकर उठ रही चिंताएं और गहरी हो गई हैं। मानवाधिकार संगठनों ने भी दोनों मामलों में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि जवाबदेही तय हो सके और कानून का शासन सुनिश्चित किया जा सके।

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