
कॉन्सेप्ट फोटो (डिजाइन)
Keshav Prasad Maurya: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मौनी अमावस्या पर संगम में पालकी में स्नान करने की कोशिश के लिए 24 घंटे के अंदर जवाब देने का नोटिस जारी किया, तो डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के एक बयान ने पूरे मामले को बिल्कुल अलग मोड़ दे दिया। जिसने सियासी हलकों का माहौल भी गरमा दिया है।
प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रही खींचतान के बारे में पूछे जाने पर उपमुख्यमंत्री ने कहा, “मैं पूजनीय शंकराचार्य के चरणों में प्रणाम करता हूं। उनका स्नान अच्छा हो। मैं उनसे प्रार्थना करता हूं और अनुरोध करता हूं कि वे इस मामले को खत्म करें।
पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम है, उनसे प्रार्थना है कि वह अच्छे से स्नान करें। इस विषय को यही खत्म करें, शंकराचार्य के अपमान के सवाल पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, उसकी जांच करके जो भी पूज्य संत आचार्य, शंकराचार्य जी का अनादर करने का नहीं होता है, अगर ऐसा किया… pic.twitter.com/2WdR3Wdk4B — Sumit Kumar (@skphotography68) January 22, 2026
उपमुख्यमंत्री का यह बयान सामने आने के बाद यूपी की राजनैतिक गलियारों में यह सवाल गूंज उठा है कि क्या केशव प्रसाद मौर्य योगी आदित्यनाथ के विपरीत रुख अख्तियार कर रहे हैं? क्योंकि सीएम योगी ने गुरुवार को ही हरियाणा के सोनीपत में कहा था कि सनातन धर्म में कुछ कालनेमि हैं हमें इनसे सावधान रहना होगा। उनके इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ इशारा माना जा रहा था। इससे पहले भी कई मौकों पर सीएम योगी और केशव प्रसाद मौर्य के बीच तनातनी की ख़बरें सामने आ चुकी हैं।
दरअसल, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मेला और पुलिस प्रशासन ने मौनी अमावस्या पर पहियों वाली पालकी में संगम में स्नान करने से रोक दिया था। शंकराचार्य ने स्नान नहीं किया। उन्होंने कहा कि जब तक अधिकारी उनसे माफी नहीं मांगते और सम्मानपूर्वक उन्हें संगम में स्नान के लिए नहीं ले जाते, तब तक वे अपने कैंप में प्रवेश नहीं करेंगे और उसी जगह बैठे रहेंगे।
शंकराचार्य की इस घोषणा के बीच प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए एक नोटिस जारी किया और 24 घंटे के अंदर यह स्पष्ट करने को कहा कि वे खुद को शंकराचार्य कैसे कह रहे हैं और उनके कैंप के बोर्ड पर ‘शंकराचार्य’ शब्द कैसे लिखा है। इससे मामला और बढ़ गया। मंगलवार को शंकराचार्य ने पत्रकारों से कहा कि वे अपना जवाब दाखिल करेंगे। उन्होंने बुधवार को अपना जवाब दाखिल किया।
अपने जवाब में उन्होंने प्राधिकरण के अधिकारियों से 24 घंटे के अंदर नोटिस वापस लेने को कहा। उन्होंने ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी। शंकराचार्य के वकील अंजनी कुमार मिश्रा द्वारा दिए गए जवाब में मेला प्रशासन को सूचित किया गया कि उनका राज्याभिषेक पहले ही हो चुका था और अदालत का आदेश बाद में आया।
इसमें यह भी चेतावनी दी गई कि यदि प्रशासन 24 घंटे के अंदर अपना नोटिस वापस नहीं लेता है, तो अदालत के आदेश को गलत तरीके से पेश करने के लिए प्रशासन के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की जाएगी, साथ ही अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
आठ पन्नों के जवाब में प्रशासन द्वारा उठाए गए बिंदुओं को स्पष्ट किया गया। हालांकि, इस बार प्रशासन ने उन्हें एक और नोटिस जारी किया, जिसमें उन्हें 24 घंटे का समय दिया गया कि वे बताएं कि माघ मेले में उनके संगठन को दी गई ज़मीन और सुविधाएं क्यों वापस नहीं ले ली जानी चाहिए और मेले में उनके प्रवेश पर स्थायी रूप से रोक क्यों नहीं लगा दी जानी चाहिए।
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इस दूसरे नोटिस के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पलटवार करते हुए पूछा कि सुविधाएं शुरू में किस आधार पर दी गई थीं और अब उन्हें किस आधार पर वापस लिया जा रहा है। मेला प्रशासन के इस दूसरे नोटिस पर शंकराचार्य जवाब देते हैं या फिर इसके खिलाफ कोई और कदम उठाते हैं यह देखना अहम होगा।






