बजट चर्चा में गायब रहे बड़े अधिकारी तो होगी सख्त कार्रवाई, महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष नार्वेकर की दो टूक

Rahul Narvekar Warning: महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बजट चर्चा के दौरान वरिष्ठ नौकरशाहों की अनुपस्थिति पर सख्त नाराजगी जताई है। उन्होंने अब ऐसे अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है।
Maharashtra Assembly Speaker Rahul Narvekar warns bureaucrats during the budget session
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra Assembly Budget Session: महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मंगलवार को एक अभूतपूर्व स्थिति देखने को मिली, जब विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने राज्य के वरिष्ठ नौकरशाहों को सीधे तौर पर चेतावनी जारी की। नार्वेकर ने स्पष्ट किया कि सदन की महत्वपूर्ण चर्चाओं, विशेषकर राज्य के बजट जैसे गंभीर विषय पर अधिकारियों की अनुपस्थिति को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

'इसे अंतिम अवसर समझें'

बजट पर चर्चा शुरू होने से ठीक पहले सदन को संबोधित करते हुए राहुल नार्वेकर ने कड़े शब्दों में कहा कि वरिष्ठ नौकरशाहों के लिए यह मेरी तरफ से अंतिम चेतावनी है। इसे आखिरी मौका समझें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब सदन में बजट जैसे नीतिगत विषयों पर बहस होती है, तो संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव (ACS) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों का उपस्थित रहना अनिवार्य है।

प्रशासनिक सहयोग की कमी पर नाराजगी

अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने पहले ही लिखित रूप में प्रशासन को सूचित किया था कि महत्वपूर्ण बहसों के दौरान अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। सदन में मंत्रियों को चर्चा के दौरान तत्काल डेटा, सांख्यिकीय जानकारी और प्रशासनिक इनपुट की आवश्यकता होती है। अधिकारियों की गैर-मौजूदगी न केवल मंत्रियों के काम में बाधा डालती है, बल्कि यह सदन की गरिमा का भी अपमान है।

होगी दंडात्मक कार्रवाई

राहुल नार्वेकर ने भविष्य के लिए स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि यदि अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी ऐसी महत्वपूर्ण चर्चाओं से नदारद पाए जाते हैं, तो सदन को उनके खिलाफ उचित और कड़ी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने याद दिलाया कि लोकतंत्र में सदन का सुचारू संचालन निर्वाचित प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल पर निर्भर करता है। अंत में, उन्होंने सदन के सदस्यों से भी आग्रह किया कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर चर्चा संपन्न करें ताकि विधानसभा की कार्यवाही कुशलतापूर्वक और बिना किसी रुकावट के संचालित हो सके।

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