

Yogi Adityanath on Avimukteshwaranand: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और योगी सरकार के बीच विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मौनी अमावस्या के दौरान स्नान अनुष्ठानों को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अब प्रयागराज माघ मेले में धरने पर बैठे हैं और प्रशासन के साथ उनका टकराव जारी है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी आदित्यनाथ की आलोचना करते हुए उन्हें सनातन धर्म के खिलाफ उनके कामों के लिए औरंगजेब से भी बुरा बताया था। इसके जवाब में आज योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एक संत के लिए धर्म से बढ़कर कुछ नहीं होता। एक संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र सर्वोपरि हैं।
हरियाणा के सोनीपत में सीएम योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का नाम लिए बिना उन पर पलटवार किया है। सीएम योगी ने कहा कि धर्म सिर्फ पहनावे या शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में भी दिखना चाहिए। उन्होंने सनातन धर्म को कमजोर करने वालों को कालनेमि कहा।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि योगी-संत और संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। यही उसके जीवन का लक्ष्य होना चाहिए। उसके पास कोई निजी संपत्ति नहीं हो सकती। धर्म ही उसकी संपत्ति है और राष्ट्र ही उसका गौरव है। अगर कोई राष्ट्र के गौरव को चुनौती देता है तो हमें खुलकर उसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए। कालनेमि जैसे कई लोग धर्म के खिलाफ काम करेंगे, इसकी आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रचेंगे। हमें उनसे सावधान रहना होगा।
आपको बता दें कि रामायण में कालनेमि नाम के एक धोखेबाज राक्षस का जिक्र है, जिसने संजीवनी बूटी लाने जा रहे हनुमान को एक संत का वेश धारण करके गुमराह करने की कोशिश की थी। बाद में हनुमान ने उसके धोखे को पहचान लिया और उसे मार डाला।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मौनी अमावस्या के मौके पर शाही जुलूस के साथ स्नान करने गए थे। प्रशासन ने उनके काफिले को रोक दिया और उन्हें दूसरे धार्मिक समूहों की तरह पवित्र स्नान करने की सलाह दी। इससे विवाद शुरू हो गया।
विवाद इतना बढ़ा कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने धरना प्रदर्शन किया और प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर दिया। सरकार के नोटिस में सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हुए उन्हें शंकराचार्य मानने से इनकार कर दिया गया। इस विवाद को लेकर विपक्षी दल भी सरकार को निशाना बना रहे हैं।