दिल्ली में INDIA ब्लॉक की मंथन...और यूपी के लिए सियासी बिसात, अखिलेश ने कैसे कांग्रेस से कही दिल की बात?

INDIA Alliance Meeting: इंडिया गठबंधन की बैठक से दूर रहे DMK और AAP का मुद्दा उठाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि विपक्षी खेमे से जुड़े दलों को साथ बनाए रखने की जिम्मेदारी कांग्रेस को निभानी होगी।
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव, (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Akhilesh Yadav In INDIA Alliance Meeting: विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ब्लॉक की सोमवार, 8 जून को दिल्ली में आयोजित बैठक ने भाजपा के खिलाफ एकजुटता का प्रदर्शन तो किया, लेकिन इस मंथन के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए अपनी रणनीति साफ कर दी। सपा सुप्रीमो ने कांग्रेस और राहुल गांधी को स्पष्ट संदेश दिया कि गठबंधन की मजबूती के लिए सहयोगियों को उनकी जमीनी ताकत के हिसाब से सम्मान और राजनीतिक स्थान देना आवश्यक है।

अखिलेश यादव ने डीएमके और आम आदमी पार्टी की अनुपस्थिति का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस को नसीहत दी कि गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते उसे अधिक समन्वयकारी और उदार रवैया अपनाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सहयोगियों को साथ बनाए रखने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से कांग्रेस की है।

राहुल के बगल में बैठक कर कांग्रेस को संदेश

इंडिया गठबंधन की बैठक में अखिलेश यादव और राहुल गांधी की नजदीकी और दोनों के बीच मुस्कुराते हुए साझा की गई तस्वीरों से कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस आगामी यूपी चुनावों में सपा के साथ तालमेल बिठाकर चलना चाहती है। अखिलेश का कांग्रेस को 'बड़ा दिल' दिखाने का बयान 2027 के विधानसभा चुनावों में सीट बंटवारे के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राहुल और अखिलेश के बीच की सकारात्मक केमिस्ट्री आगामी 2027 के चुनावी मैदान में दोनों दलों के एक साथ उतरने के संकेत दे रही है। अखिलेश यादव ने कांग्रेस को पिछले लोकसभा चुनाव का गणित याद दिलाते हुए कहा कि सपा द्वारा दी गई 17 सीटों में से कांग्रेस छह जीतने में सफल रही।

सपा प्रमुख का इशारा साफ था कि 'इंडिया' ब्लॉक की सफलता में क्षेत्रीय दलों के मजबूत संगठनात्मक ढांचे और सामाजिक आधार की बड़ी भूमिका रही है। यह बयान केवल पिछले चुनाव का मूल्यांकन नहीं, बल्कि यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले उत्तर प्रदेश में सपा की केंद्रीय भूमिका तय करने की कवायद भी है।

8 जून को दिल्ली में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, (सोर्स- सोशल मीडिया)
8 जून को दिल्ली में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, (सोर्स- सोशल मीडिया)

सीट शेयरिंग का गणित और सपा का प्लान

समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में विपक्षी राजनीति का केंद्र बनी रहना चाहती है और भविष्य में सीट बंटवारे पर अपनी निर्णायक पकड़ बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सपा कांग्रेस को प्रदेश के हर जिले में एक सीट देने की योजना पर काम कर रही है, ताकि पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष न फैले। इसके लिए अखिलेश यादव ने अपने विधायकों और जिलाध्यक्षों से सुझाव मांगे हैं। वहीं, रिटायर्ड आईएएस आलोक रंजन के नेतृत्व में सपा की सर्वे टीम कांग्रेस को गठबंधन के तहत 70 से 75 सीटें देने का सुझाव दे चुकी है। इन सीटों का चयन जातीय समीकरणों और संभावित उम्मीदवारों की जमीनी मजबूती के आधार पर किया जाएगा।

2022 में अकेले लड़ी थी कांग्रेस

गौरतलब है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने वाली कांग्रेस को 399 सीटों पर मात्र दो सीटों से संतोष करना पड़ा था, जबकि सपा के साथ गठबंधन करने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे बेहतर परिणाम मिले। सपा नेतृत्व इसी अनुभव के आधार पर भविष्य की वार्ता तय करना चाहता है।

अखिलेश यादव का रुख स्पष्ट करता है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी कांग्रेस को महत्वपूर्ण सहयोगी तो मानती है, लेकिन किसी भी स्थिति में खुद को लीड करने वाली भूमिका से पीछे नहीं हटाना चाहती। दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक के जरिए अखिलेश ने न केवल यूपी के सियासी समीकरण साधे, बल्कि कांग्रेस पर दबाव बनाकर राज्य में सपा का पलड़ा भारी रखने का साफ संकेत भी दे दिया है।

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