

Dharmendra Pradhan Resignation: नीट परीक्षा में धांधली और पेपर लीक विवाद को लेकर चौतरफा दबाव का सामना कर रहे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के सामने आते ही विपक्षी दलों और प्रदर्शनकारी छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई।
मुंबई में कांग्रेस कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जश्न मनाया और एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाईं। कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत मिठाई लेकर पहुंचे और इस फैसले को छात्रों के अनवरत संघर्ष की ऐतिहासिक जीत करार दिया।
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष और सांसद वर्षा एकनाथ गायकवाड़ ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे "अहंकार की हार और सत्य व संविधान की जीत" बताया। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर छात्र पिछले एक महीने से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन सरकार उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही थी।
गायकवाड़ ने कहा कि यह इस्तीफा सरकार द्वारा स्वीकार की गई नैतिक जवाबदेही का परिणाम है, लेकिन संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक कि पूरे परीक्षा तंत्र में पारदर्शी सुधार नहीं किए जाते।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (X) पर पोस्ट कर कहा कि यह इस्तीफा केवल छात्रों, विपक्ष और आंदोलनकारियों के निरंतर दबाव के कारण ही संभव हो सका है। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 28 दिनों से अधिक समय से डटे युवाओं के जज्बे को सलाम किया।
सुप्रिया सुले ने कहा, "यह अंत नहीं है, हम संसद में नीट मुद्दे पर विस्तृत चर्चा और वास्तविक जवाबदेही के साथ-साथ देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक संवैधानिक सुधारों की मांग करते हैं।"
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं की एकजुट शक्ति ने सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया है।
राउत ने कड़े शब्दों में कहा, "धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि मोदी-शाह की जोड़ी अजेय नहीं है, आने वाले समय में जनता उन्हें भी सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाएगी।" इस घटनाक्रम के बाद देश भर की राजनीति का पारा और चढ़ गया है।