
प्रतीकात्मक फोटो सोर्स- सोशल मीडिया
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में एक नया और महत्वपूर्ण शैक्षणिक बदलाव लाया गया है। अब पूरे सत्र में 10 दिन विद्यार्थियों को बिना बस्ते के स्कूल बुलाया जाएगा, जिसे ‘बैगलेस डे’ कहा जाएगा। इस पहल का लक्ष्य विद्यार्थियों को आनंदमय वातावरण में सीखने का अनुभव प्रदान करना है।
परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए कैलेंडर जारी कर दिया गया है, जिसमें तत्काल प्रभाव से हर शैक्षिक सत्र में 10 ‘बैगलेस डे’ आयोजित करने का निर्देश है। अब हर शनिवार को विद्यालयों में ‘मस्ती की पाठशाला’ लगेगी, जिसका उद्देश्य तनावमुक्त और गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर देना है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी की ओर से यह व्यवस्था लागू की गई है।
इस व्यवस्था के तहत, नवंबर के शनिवार, दिसंबर में सभी चारों शनिवार, जनवरी में तीसरे व चौथे शनिवार, और फरवरी में पहले व द्वितीय शनिवार को बैगलेस डे आयोजित किया जाएगा।
इस ‘बैगलेस डे’ के माध्यम से सात उद्देश्यों की पूर्ति की जाएगी:
1. आनंदमय वातावरण में विद्यार्थियों को सीखने का अनुभव प्रदान करना।
2. अनुभवात्मक शिक्षा (Experiential Learning) के तहत व्यावहारिक और अनुभवजन्य शिक्षा देना।
3. शिक्षा के समग्र और समावेशी विकास पर बल देना।
4. विद्यार्थियों के शारीरिक व मानसिक विकास के साथ उनमें वास्तविक जीवन का निष्पक्ष विश्लेषण और मूल्यांकन की समझ विकसित करना।
5. सामुदायिक जुड़ाव के तहत समाज से जुड़ने और पारस्परिक निर्भरता की भावना विकसित करना।
6. व्यावसायिक उन्मुखीकरण विकसित करना: स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों व स्थानीय व्यावसायों की समझ विकसित की जाएगी, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों से निपट सकें।
7. राष्ट्रीय संकल्पना के प्रति जागरूक करना: आत्मनिर्भर भारत, स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल और ओडीओपी (ODOP) की अवधारणा के बारे में बताना।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की ओर से ‘आनंदम मार्गदर्शिका’ स्कूलों के लिए तैयार की गई है। इस मार्गदर्शिका में कुल 34 विषय और गतिविधियां शामिल हैं, जिनके अनुसार ही कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन गतिविधियों को तीन भागों में विभाजित किया गया है:
1. विज्ञान, पर्यावरण व प्रौद्योगिकी।
2. सार्वजनिक कार्यालय, स्थानीय उद्योग व व्यावसाय।
3. कला, संस्कृति व इतिहास। बैगलेस डे में विद्यार्थियों को खेल-खेल में जीवन कौशल की शिक्षा और संस्कृति व इतिहास के बारे में जानकारी दी जाएगी।
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इस नई व्यवस्था में अभिभावकों को भी शामिल किया जाएगा। बैगलेस डे वाले दिन उन्हें स्कूल आमंत्रित किया जाएगा। इस दौरान उन्हें यह बताया जाएगा कि पढ़ाई के साथ-साथ किस तरह उन्हें अपने बच्चों के व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास सुनिश्चित करना है, और उन्हें इसके लिए जागरूक किया जाएगा। वर्तमान में स्कूलों में गतिविधि व प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण, विभिन्न क्लबों का गठन, स्पोर्ट्स गतिविधियां, लर्निंग बाई डुइंग कार्यक्रम और राष्ट्रीय अविष्कार अभियान के कार्यक्रम के अंतर्गत क्विज प्रतियोगिता और शैक्षिक भ्रमण कराया जा रहा है।






