

Vashi Bridge Suicide Attempt: नवी मुंबई के वाशी ब्रिज से एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक 20 वर्षीय युवती ने अपने बॉयफ्रेंड द्वारा मोबाइल पर 'ब्लॉक' किए जाने से आहत होकर चलती लोकल ट्रेन से खाड़ी में छलांग लगा दी। मंगलवार सुबह करीब 8:30 बजे हुई इस घटना ने हार्बर लाइन के यात्रियों के बीच खलबली मचा दी। गनीमत रही कि खाड़ी में मौजूद मछुआरों ने देवदूत बनकर युवती को डूबने से बचा लिया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।
चेम्बूर की रहने वाली यह युवती मानसिक तनाव और नैराश्य के चलते आत्मघाती कदम उठाने के इरादे से घर से निकली थी। वाशी खाड़ी पुल पर जैसे ही ट्रेन पहुंची, उसने दरवाजे से सीधे गहरे पानी में छलांग लगा दी। हालांकि, उसकी किस्मत अच्छी थी कि उसके कंधे पर मौजूद सॅक (बैग) में हवा भर गई, जिससे वह पानी की सतह पर कुछ देर तक तैरती रही और पूरी तरह डूबी नहीं।
वाशी गांव के स्थानीय मछुआरे महेश सुतार और उनके साथियों ने जब युवती को ट्रेन से वाशी ब्रिज में गिरते देखा, तो उन्होंने एक पल की भी देरी नहीं की। उन्होंने तुरंत अपनी नाव उस दिशा में मोड़ दी जहां युवती संघर्ष कर रही थी। मछुआरों ने कड़ी मशक्कत के बाद युवती को सुरक्षित पानी से बाहर निकाला और किनारे पर ले आए। इस साहसी और त्वरित कार्रवाई की पूरे नवी मुंबई में सराहना हो रही है। फिलहाल युवती की स्थिति स्थिर बताई जा रही है और उसे प्राथमिक उपचार के बाद काउंसलिंग के लिए भेजा गया है।
वाशी पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में युवती ने जो कारण बताया, वह बेहद चौंकाने वाला है। उसने पुलिस को बताया कि उसके बॉयफ्रेंड ने बिना किसी स्पष्ट कारण के उसे मोबाइल फोन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 'ब्लॉक' कर दिया था। बार-बार संपर्क करने की कोशिश के बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला, तो वह गहरे अवसाद (Depression) में चली गई। इसी गुस्से और मानसिक दबाव में आकर उसने अपनी जीवनलीला समाप्त करने का फैसला किया। पुलिस अब उस युवक की भी पहचान करने की कोशिश कर रही है।
यह घटना आधुनिक दौर में युवाओं के बीच बढ़ती मानसिक अस्थिरता और डिजिटल रिजेक्शन के प्रति संवेदनशीलता को उजागर करती है। मनोचिकित्सकों का मानना है कि छोटी-छोटी बातों पर इस तरह के चरम कदम उठाना चिंता का विषय है। वाशी पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए युवती के परिजनों को सूचित कर दिया है। पुलिस अधिकारियों ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से अपील की है कि वे कठिन समय में किसी विश्वसनीय व्यक्ति या प्रोफेशनल काउंसलर से बात करें, न कि भावनाओं में बहकर अपनी जान जोखिम में डालें।