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2024 चुनाव में सत्ताधारियों को रुला सकता है प्याज, जानिए महाराष्ट्र में क्या है किसानों का हाल
- Written By: अनिल सिंह

- प्याज के निर्यात पर रोक से किसानों में असंतोष का चुनाव पर होगा असर
नवभारत डिजिटल डेस्क: 2014 से पहले प्याज की बढ़ी हुई कीमत और सिलेंडर के आसमान छूते दाम ने कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ कर बाहर फेंक दिया था। कांग्रेस आज तक प्याज के आंसू ही रो रही है। ऐसे में प्याज का आसमान छूता भाव और प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध से मौजूदा सरकार ने जनता और किसानों को नाराज करने का जो काम किया है, वह आगामी चुनाव में उन्हें प्याज के आंसू रुला सकता है। महंगाई का मुद्दा भले ही विधानसभा चुनाव में नदारत रहा हो लेकिन आम जनता इससे त्रस्त जरूर है, प्याज की आसमान छूती कीमत और बीजेपी राज्यों में गैस सिलेंडर के बढ़े हुए दाम आगामी चुनाव में बीजेपी का समीकरण खराब कर सकते हैं।
सत्ताधारियों की होगी परीक्षा
महाराष्ट्र में सूखे और बिन मौसम बारिश की मार किसान झेल रहे हैं। सूखे ने ख़रीफ़ सीज़न को बाधित कर दिया है और प्याज निर्यात प्रतिबंध से किसानों में असंतोष फैल गया है। आगामी लोकसभा चुनाव में प्याज का मुद्दा असरदार रहने वाला है। इसलिए, स्वाभाविक रूप से, आगामी चुनावों में शासकों की परीक्षा होगी।

कम दाम पर प्याज बेचना पड़ा
कसमादे इलाके में प्याज बड़ी मात्रा में उगाया जाता है। पिछले साल किसानों को अच्छी पैदावार मिली थी और उन्होंने प्याज को चाली में भंडारित किया था। लेकिन ज्यादातर प्याज खराब होकर बिकने के कारण प्याज की कीमतें बढ़ गई। किसानों को उत्पादन लागत से कम दाम पर प्याज बेचना पड़ा।
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प्याज की खेती पर सूखे का प्रभाव
इसी के तहत केंद्र सरकार ने प्याज पर निर्यात शुल्क बढ़ा दिया है। व्यापारियों ने इसका विरोध किया था। उस वक्त किसानों ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। इस वर्ष सूखे की स्थिति के कारण किसानों ने कम पानी में लाल प्याज का उत्पादन करने का प्रयास किया। लेकिन अब उन्हें उसकी कीमत नहीं मिल रही है।

बेमौसम बारिश ने किया बड़ा नुकसान
बेमौसम बारिश ने इसमें और इजाफा कर दिया। किसानों ने जितना संभव हो सके उतना प्याज बचाकर वित्तीय समीकरण को संतुलित करने की कोशिश शुरू कर दी थी। किसानों में यह भावना प्रबल है कि केंद्र सरकार ने निर्यात पर प्रतिबंध लगाकर पासा पलट दिया है। किसानों ने सड़कों पर उतरकर नाराजगी जताई। लेकिन सरकार को कोई असर नहीं पड़ा। इसका नतीजा चुनाव में उन्हें देखने को मिल सकता है।
अगले सप्ताह पर नजर
ख़रीफ़ सीज़न में बारिश की कमी के कारण, किसान निराश हो गए हैं क्योंकि उन्होंने बीज, उर्वरक, श्रम और जुताई पर बहुत पैसा खर्च किया है और कुछ भी फसल नहीं हुई है। किसानों की दृष्टि से हर तरफ प्रतिकूल परिस्थितियां निर्मित हो गई हैं। सरकार इस पर गंभीर नहीं हुई तो किसानों का आक्रोश नीलामी बंद से लेकर रास्ता-रोको आंदोलन तक पहुंच गया। प्याज बाजार का भविष्य आने वाले हफ्तों में सरकार के रुख, व्यापारियों की नीतियों और प्याज किसानों के मूड पर निर्भर करेगा।
प्रतिक्रिया
भगवान जाधव, जिला समन्वयक (महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ) का कहना है कि केंद्र के प्रतिनिधि प्याज उत्पादकों के पक्ष में नहीं खड़े हैं. इसलिए प्याज उत्पादकों में आक्रोश है। प्याज पर निर्यात प्रतिबंध को तुरंत हटाने के लिए केंद्र सरकार से बात की जानी चाहिए। लगातार आर्थिक गणित बिगड़ रहा है। बाजार भाव गिर रहा है। जब ऐसा देखा गया कि उगाए गए प्याज को दाम मिलेगा तो सरकार ने निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया।
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