Nashik Kumbh Mela: सीएम फडणवीस की बड़ी बैठक, 10 अखाड़ों के महंत होंगे शामिल, त्र्यंबकेश्वर के विकास पर मंथन

Kumbh Mela: नासिक सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों को लेकर मुंबई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। साधु ग्राम और बुनियादी ढांचे के विकास पर होगी चर्चा।
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नासिक कुंभमेला (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Simhastha Kumbh Mela 2026: आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की परंपरा और भव्यता को सुनिश्चित करने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कमर कस ली है। त्र्यंबकेश्वर में होने वाले इस महाआयोजन की विकास योजनाओं को गति देने के लिए जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में मुंबई में एक उच्च स्तरीय और निर्णायक बैठक आयोजित होने जा रही है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रशासन, सरकार और अखाड़ों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है ताकि विश्व भर से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को उत्तम सुविधाएं मिल सकें। इस महत्वपूर्ण चर्चा के लिए त्र्यंबकेश्वर के प्रमुख साधु-महंतों और अखाड़ा परिषद के पदाधिकारियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।

अखाड़ों की सहभागिता और 'साधु ग्राम' का नियोजन

कुंभ मेले की व्यवस्थाओं में साधु-संतों और अखाड़ों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रत्येक अखाड़े से 2 साधु प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल होंगे। वर्तमान में प्रशासन का ध्यान 'साधु ग्राम' के उचित नियोजन पर है। कुंभ मेला आयुक्त ने अखाड़ों से उनकी आवश्यकताओं के बारे में विस्तृत जानकारी मांगी है, ताकि बाहर से आने वाले महामंडलेश्वरों और अखाड़ों के लिए पर्याप्त भूमि और सुविधाएं आवंटित की जा सकें।

त्र्यंबकेश्वर में स्थानीय बैठक की उठी मांग

भले ही पहली बड़ी बैठक मुंबई में प्रस्तावित है, लेकिन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के कोषाध्यक्ष महंत शंकरानंद सरस्वती महाराज ने एक महत्वपूर्ण मांग रखी है। उनका कहना है कि कुंभ मेले की समीक्षा बैठक केवल मंत्रालय (मुंबई) तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि एक सभा त्र्यंबकेश्वर की पवित्र भूमि पर भी आयोजित होनी चाहिए ताकि अधिकारी धरातल की समस्याओं को समझ सकें। सूत्रों के अनुसार, मुंबई की बैठक के बाद अगली सभा स्थानीय स्तर पर आयोजित होने की प्रबल संभावना है।

बारिश और समय सीमा की कठिन चुनौती

सिंहस्थ कुंभ मेले का औपचारिक ध्वजारोहण अक्टूबर 2026 में होना है। वर्तमान तिथि (अप्रैल 2026) को देखते हुए प्रशासन के पास अब केवल साढ़े छह महीने का प्रभावी समय शेष है। यह समय सीमा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि त्र्यंबकेश्वर में जून से अक्टूबर के दौरान अत्यधिक भारी बारिश होती है।

स्थानीय नागरिकों और संतों के मन में यह सवाल है कि मानसून के दौरान सड़कों, घाटों और अन्य निर्माण कार्यों को कैसे पूरा किया जाएगा? हालांकि, प्रशासन का दावा है कि वे मानसून शुरू होने से पहले ही नींव के काम पूरे कर लेंगे और बारिश के दौरान भी तकनीकी तालमेल बैठाकर कार्य जारी रखा जाएगा ताकि समय सीमा का उल्लंघन न हो।

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