महाराष्ट्र का कृषि निर्यात ठप, हवाई और समुद्री मार्ग बंद होने से प्याज और फलों के दाम गिरने की आशंका

Nashik Export Crisis: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध तनाव के कारण महाराष्ट्र से प्याज, अंगूर और अनार के निर्यात पर ब्रेक लग गया है, जिससे किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है।
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Nashik export crisis (सोर्सः सोशल मीडिया)
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West Asia war: ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते युद्ध तनाव का सीधा असर अब नाशिक जिले सहित पूरे महाराष्ट्र के कृषि निर्यात पर पड़ा है। खाड़ी देशों को होने वाला निर्यात अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है, जिससे न केवल प्याज बल्कि अनार, अंगूर और सब्जियों की खेप भी बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर अटक गई है।

व्यापारियों ने आशंका जताई है कि निर्यात रुकने से स्थानीय बाजारों में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे किसानों और निर्यातकों को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा।

परिवहन सेवाओं पर लगा ‘ब्रेक’

क्षेत्र में सुरक्षा की बदलती स्थिति को देखते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया है। यूनिफीडर एजेंसीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और प्रमुख शिपिंग कंपनियों द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार, अगले आदेश तक इस जलमार्ग से जहाजों का आवागमन निलंबित रहेगा। साथ ही दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से उड़ानों के स्थगित होने के कारण हवाई मार्ग से होने वाला व्यापार भी पूरी तरह ठप हो गया है। मनमाड कृषि मंडी समिति में जमा होने वाले प्याज और अन्य कृषि माल से लदे सैकड़ों वाहन वहीं अटके पड़े हैं।

 महाराष्ट्र से प्याज, अंगूर और अनार के निर्यात पर ब्रेक

आयात-निर्यात का बिगड़ा संतुलन

भारत के यूएई, कतर और सऊदी अरब जैसे खाड़ी देशों के साथ घनिष्ठ व्यापारिक संबंध हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए ईरान से कच्चा तेल, पेट्रोकेमिकल्स और खजूर का आयात करता है, जबकि यहां से बासमती चावल, दवाएं, चाय, चीनी और ऑटो पार्ट्स का निर्यात किया जाता है। विशेष रूप से महाराष्ट्र से बड़ी मात्रा में प्याज, अनार और सब्जियां इन देशों को भेजी जाती हैं। मौजूदा संकट के कारण न केवल निर्यात प्रभावित हुआ है, बल्कि आयात रुकने से भारत में कई वस्तुओं की किल्लत और उनके दाम बढ़ने की आशंका भी बढ़ गई है।

किसानों और व्यापारियों की बढ़ी चिंता

व्यापारियों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका प्रतिकूल प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम नागरिकों, किसानों और व्यापारियों पर पड़ेगा। एक ओर पहले से ही प्याज के भावों में उतार-चढ़ाव जारी है, ऐसे में निर्यात बंद होने से घरेलू मंडियों में आवक बढ़ेगी और कीमतें और गिर सकती हैं। फिलहाल निर्यातक और व्यापारी वैश्विक स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।

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