
(डिजाइन फोटो)
यह सवाल काफी अहमियत रखता है कि क्या केंद्रीय बजट में दिए गए प्रोत्साहन से प्रेरित होकर उद्योग अपने यहां अधिक लोगों को काम देंगे? बड़ी कंपनियों में इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए सरकार सहयोग देगी। यदि 1 करोड़ युवा देश की 500 बड़ी कंपनियों में 5 वर्षों तक विद्यावेतन सहित इंटर्नशिप करेंगे और कामकाज का अनुभव हासिल करेंगे तो क्या वे नौकरी के लिए अधिक योग्य बन जाएंगे? ऐसा हुआ तो क्या उनके लिए नौकरियां उपलब्ध होंगी? दिक्कत यह है कि श्रम आधारित उद्योगों में निजी निवेश बढ़ नहीं रहा है।
वाहन निर्माण और मशीनी सामग्री उद्योगों में आटोमेशन तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए बजट ने समस्या को पहचाना तो है लेकिन उसका परिपूर्ण समाधान नहीं खोजा है। इस वर्ष के आर्थिक सर्वे के अनुसार देश को प्रतिवर्ष 80 लाख नौकरियों जरूरत की है। 2014 से 2023 तक 8.9 करोड़ रोजगार सृजन का दावा किया गया है। इसका मतलब है कि बजट में पहली बार रोजगार पानेवाले को 15,000 रुपए तक सब्सिडी दी जाएगी।
सरकार को आशा है कि बेरोजगार रहकर सब्सिडी लेने की बजाय युवक पहली नौकरी पाकर आनंदित होंगे, रेवडियां बांटने की बजाय बेरोजगारों को रोजगार देना हमेशा बेहतर रहता है। इसमें युवा भी श्रम की सार्थकता समझाने लगता है, प्रतिवर्ष 89 लाख रोजगार पैदा किए गए, भारत में श्रमिक वर्ग की तादाद लगभग 60 करोड़ है। अक्टूबर 2020 में आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना लागू की गई। इसमें नए उम्मीदवारों के साथ उन लोगों को भी काम मिला जो कोविड महामारी के दौरान अपना कामकाज खो चुके थे।
इस योजना में नियोक्ता और कर्मचारी दोनों को कर्मचारी भविष्य निधि कोष के दायरे में लाया गया जिसमें वेतन को 24 फीसदी राशि जमा होती थी। 1,000 कर्मचारियों से अधिक की फर्म में सभी नए कर्मियों का भविष्य निधि अंशदान वेतन का 12 प्रतिशत था। 1,50,000 फर्मों के 60,00,000 कर्मचारियों को इस योजना में शामिल किया गया। निर्यात सेवाओं, टेक्सटाइल व ट्रेडिंग कमर्शियल क्षेत्रों ने रोजगार प्रदान करने के साथ ही विकास में योगदान दिया। छोटी फर्म जानती हैं कि उन्हें इसी हालत में बने रहकर लाभ नहीं मिलेगा। उन्हें प्रोत्साहन देकर एमएसएमई के रूप में विकसित किया जा सकता है।
चीन में गांवों व शहरों में उद्योगों को क्रमशः बढ़ावा दिया गया। 1980 में चीन में ऐसे 14 लाख ग्रामीण व शहरी लघु उद्योग थे जिनमें 3 करोड़ कर्मचारी थे। 1996 में ऐसे उद्योगों की संख्या 2.3 करोड़ और उनके कर्मचारियों की तादाद 13.5 करोड़ हो गई। चीन की जीडीपी में उनका 30 प्रतिशत योगदान था। चीन में आसान उत्पादन तकनीक के साथ श्रमिक काम करते हैं जिस पर लागत कम आती है। चीन के शहरी व ग्रामीण उद्योगों में तैयार 48 प्रतिशत माल का निर्यात होता है। बजट में पहली बार रोजगार पानेवाले को 15,000 रुपए तक सब्सिडी दी जाएगी। सरकार को आशा है कि बेरोजगार रहकर सब्सिडी लेने की बजाय युवक पहली नौकरी पाकर आनंदित होंगे। रेवडियां बांटने की बजाय बेरोजगारों को रोजगार देना हमेशा बेहतर रहता है। इसमें युवा भी श्रम की सार्थकता समझने लगता है।लेख चंद्रमोहन द्विवेदी द्वारा






