
नीतीश कुमार (डिजाइन फाेटो)
Bihar NDA Government Development Challenges: बिहार में नीतीशकुमार के नेतृत्व में बनने वाली एनडीए वि की नई सरकार के सामने 5 वर्षों में अपने वादे पूरे करते हुए राज्य का विकास करने की चुनौती रहेगी। उद्योगों व सेवा क्षेत्र को उसे प्राथमिकता देनी होगी। बिहार की जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान लगभग 58 प्रतिशत है जबकि उद्योग का योगदान 21.5 प्रतिशत है।
एकल खिड़की से क्लीयरेंस देकर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जा सकता है। वस्त्रोद्योग, खाद्य प्रक्रिया, इथेनॉल, नवीनीकृत ऊर्जा, आईटी से संलग्न सेवाएं बढ़ाकर तथा पर्यटन को बढ़ावा देकर 2030 तक राज्य जीडीपी में वृद्धि की जा सकती है।
पटना व बोधगया में निजी व सार्वजनिक भागीदारी से अच्छी होटलें खोली जाएं, अभी देश में प्रति व्यक्ति सबसे कम बिजली का बिहार में उपयोग होता है। बुनियादी ढांचे में सुधार भी बाकी है। वहां विद्युत, लॉजिस्टिक्स, सड़क व डिजिटल नेटवर्क में निवेश बढ़ाए जाने की जरूरत है, कृषि को बढ़ावा देने के लिए सिंचाई का विस्तार, मिट्टी के परीक्षण के अलावा दलहन, तिलहन का उत्पादन बढ़ाना होगा।
हर जिले में कौशल विकास मिशन सक्रिय करने से राज्य के 5,00,000 युवा निर्माण, लॉजिस्टिक्स, सेवाओं के लिए तैयार हो सकेंगे। अभी बिहार के सिर्फ 11 प्रतिशत लोग शहरों में रहते हैं इसलिए संतुलित रूप से शहरीकरण किया जा सकता है। पटना, मुजफ्फरपुर व भागलपुर को बिहार शहरी विकास मिशन के जरिए और बेहतर बनाया जा सकता है। पर्यटन क्षेत्र में विकास की काफी संभावना है।
बिहार में कई सरकारी विभाग अपने हिस्से की रकम का इस्तेमाल नहीं कर पाते और उसे लौटा देते हैं। इसलिए नियोजन के साथ विकास को गति देनी होगी। कर ढांचा बढ़ाकर सरकारी आय में वृद्धि की जा सकती है। महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के अलावा जीवनयापन के साधन भी उपलब्ध कराने होंगे।
बिहार में साक्षरता 74.3 प्रतिशत है इसमें महिला साक्षरता दर 66.1 प्रतिशत है। इसके बावजूद तीसरी कक्षा के सिर्फ 39 प्रतिशत छात्र दूसरी कक्षा की किताब पढ़ पाते हैं तथा केवल 19 प्रतिशत को भाग देना आता है। इसलिए शिक्षा के स्तर में भी सुधार की आवश्यकता है।
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राज्य में पंचायत, नगरपालिकाओं को सशक्त करना होगा जिसके लिए उन्हें अधिक वित्तपूर्ति के अलावा आय के साधन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना होगा। वह इस लायक बनें कि विकास के लिए बाजार में पूंजी उठा सकें। महिला उद्योजकों को वित्तीय सहायता व प्रशिक्षण देकर आगे बढ़ाया जा सकता है।
बिहार में प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत की एक तिहाई है। आधी आबादी कृषि पर निर्भर रहती है। लगभग 10 लाख बिहारी युवा प्रतिवर्ष अन्य राज्यों में रोजगार खोजने जाते हैं। अन्य राज्यों में लगभग 1 करोड़ बिहारी नौकरी कर रहे हैं। राज्य के आधे परिवार उनके भेजे पैसों पर पलते हैं। बिहार का औद्योगिकरण कर इस पलायन को कम किया जा सकता है।
लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा






