रमजान के महीने में कत्लेआम...क्यों नहीं थम रहा अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष? किस फतवे को लेकर फंसा है मामला

Pakistan Airstrike Afghanistan: पाकिस्तान ने अफगान सीमा पर TTP और ISKP के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की, 16 लोग मरे; तालिबान ने जवाब की चेतावनी दी, तनाव और बढ़ गया।
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पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर किया हवाई हमला (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Pak-Afghan Conflict: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता तनाव अब खुली सैन्य कार्रवाई में बदल गया है। रविवार तड़के पाकिस्तान की सेना ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती क्षेत्रों में एयरस्ट्राइक की। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि ऑपरेशन में उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और इस्लामिक स्टेट (ISKP) के सात ठिकानों को निशाना बनाया। पाकिस्तान सरकार ने इसे हाल के आत्मघाती हमलों के जवाब में “इंटेलिजेंस-बेस्ड ऑपरेशन” बताया।

पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने कहा कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं कि इन हमलों की साजिश अफगान जमीन से संचालित नेटवर्क ने रची। मानवाधिकार संगठन इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (IHRF) के अनुसार इस हमले में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। हालांकि पाकिस्तान की तरफ से आधिकारिक आंकड़े अभी जारी नहीं हुए हैं। तालिबान ने इस हमले का जवाब देने की चेतावनी दी है, और तनाव की बढ़ती वजह एक फतवा भी है।

TTP के समर्थन को लेकर बवाल

नवंबर में पाकिस्तान ने अफगान तालिबान के सुप्रीम लीडर हिबतुल्लाह अखुंदजादा से यह मांग की थी कि वह पाकिस्तान में TTP की ओर से की जा रही जंग को गैर-इस्लामी घोषित करें। इसका मतलब था कि तालिबान खुलकर TTP के खिलाफ धार्मिक आदेश जारी करे। लेकिन तालिबान ने इस मांग को ठुकरा दिया। तालिबान वार्ता दल के प्रमुख और अफगान उप गृह मंत्री रहमतुल्लाह नजीब ने कहा कि अमीर ही हुक्म देता है, फतवे नहीं। पाकिस्तान अगर फतवा चाहता है तो उसे औपचारिक आवेदन के जरिए दारुल इफ्ता में जाना होगा, और फतवा शरीयत के अनुसार ही जारी होगा।

तालिबान ने स्पष्ट किया कि वह अफगानिस्तान से बाहर लड़ी जा रही किसी जंग को न तो जायज कह सकता है और न ही नाजायज। साथ ही उसने दो शर्तें रखीं: पाकिस्तान को अपने देश में ISIS के ठिकाने खत्म करने होंगे और उनके नेताओं को गिरफ्तार करना होगा, साथ ही पाकिस्तानी सैन्य विमान अफगान सीमा का उल्लंघन बंद करें।

सीमा पर झड़पों के कारण हालात बिगड़े

अक्टूबर के बाद सीमा पर झड़पों के कारण हालात और बिगड़े। कतर की मध्यस्थता में 19 अक्टूबर को युद्धविराम हुआ, लेकिन इस्तांबुल वार्ता तक कोई समझौता नहीं हुआ। 2021 में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद TTP ने पाकिस्तान में गुरिल्ला हमले तेज कर दिए। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP को अफगानिस्तान से समर्थन मिलता है, जबकि तालिबान इसे सिरे से नकारता है। यही मतभेद दोनों देशों के बीच लगातार टकराव की मुख्य वजह बने हुए हैं।

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