भोर नगरपालिका का बजट विवादों में, एनसीपी-बीजेपी टकराव से बैठक स्थगित; विकास योजनाओं पर अनिश्चितता

Bhor Municipal Council: भोर नगरपालिका की बजट बैठक एनसीपी और बीजेपी के टकराव के कारण स्थगित हो गई। कोरम पूरा न होने से प्रशासनिक कार्यों और विकास योजनाओं पर अनिश्चितता छा गई है।
Bhor Municipality budget in dispute, meeting postponed due to NCP-BJP clash; uncertainty over development plans
Pune District Politics ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Pune District Politics: पुणे भोर नगरपालिका का वार्षिक बजट वर्तमान में सत्ताधारी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच चल रहे कड़े राजनीतिक संघर्ष की भेंट चढ़ गया है।

बजट पेश करने के लिए बुलाई गई स्थायी समिति की बैठक विवादों के कारण टल गई है, जिससे नगरपालिका के प्रशासनिक कार्यों और आगामी विकास योजनाओं पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

नगराध्यक्ष रामचंद्र आवारे ने सोमवार को स्थायी समिती की बैठक आयोजित की थी, लेकिन भाजपा सदस्यों ने इस बैठक को पूरी तरह से 'अवैध' करार दिया है।

विपक्ष का तर्क है कि नियमों के अनुसार बजट सत्र के लिए बैठक बुलाने की एक निश्चित समय सीमा होती है, जिसका उल्लंघन किया गया है। भाजपा सदस्यों द्वारा बैठक का बहिष्कार करने के कारण कोरम पूरा नहीं हो सका, जिसके परिणामस्वरूप सभा को बिना किसी निर्णय के स्थगित करना पड़ा।

आचारसंहिता और देरी के कारण

नगरपालिका प्रशासन के अनुसार, बजट प्रक्रिया में देरी के पीछे कई व्यावहारिक कारण थे, 23 जनवरी को समितियों के गठन के बाद सरकारी छुट्टियों और उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के निधन के कारण राज्यव्यापी शोक के चलते कामकाज प्रभावित हुआ था। नगराध्यक्ष ने पहले 31 जनवरी को बैठक बुलाई थी, लेकिन जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों की आचारसंहिता लागू होने के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। सत्ता पक्ष का कहना है कि उन्होंने परिस्थितियों को देखते हुए ही बैठक को आगे बढ़ाया था, लेकिन विपक्ष इसे नियमों की अनदेखी मान रहा है।

डीएम की शिकायत

विपक्ष ने बजट विवाद के इस मामले को केवल नगरपालिका के स्तर तक सीमित न रखते हुए उच्च अधिकारियों के समक्ष उठा दिया है। भाजपा की उपनगराध्यक्षा जयश्री शिंदे, गट नेता अमित सागले और अन्य पार्षदों ने 2 फरवरी को जिलाधिकारी के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में गंभीर आरोप लगाया गया है कि नगराध्यक्ष ने 31 जनवरी की वैधानिक समय सीमा के भीतर बैठक न बुलाकर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। विपक्ष का तर्क है कि नियमों की अनदेखी कर बुलाई गई कोई भी बैठक कानूनी रूप से मान्य नहीं हो सकती।

जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

इस शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने नपा मुख्य कार्यकारी अधिकारी से इस पूरे प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मोर विपक्षी दल का स्पष्ट रूप से कहना है कि नियमानुसार 31 जनवरी के बाद बजट सत्र के लिए बैठक बुलाने का अधिकार केवल जिलाधिकारी के पास सुरक्षित होता है, नगराध्यक्ष के पास नहीं।

ऐसे में नगराध्यक्ष द्वारा अपने स्तर पर बैठक का नियोजन करना पूरी तरह से नियम विरुद्ध है, जिसके कारण अब इस मामले में अंतिम निर्णय जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर टिका है।

कालिया के विकास का हमारा विरोध नही है लेकिन बजट के लिए स्थायी समिति की बैठक कानूनी रूप से होनी चाहिए, ऐसी हमारी मांग है। अवैध बैठक हम होने नहीं देंगे।

- भोर, उपनगराध्यक्ष, जयश्री शिंदे 

एक दिन का नोटिस देकर 31 जनवरी को बजट पर चर्चा के लिए स्थायी समिति की बैठक बुलाई गई थी। लेकिन, स्थायी समिति के सदस्यों ने एक दिन के नोटिस स पर आपत्ति जताई, जिसके कारण नगराध्यक्ष ने सभा स्थगित कर दी और फिर 10 फरवरी को नोटिस देकर 16 फरवरी को बैठक का नियोजन किया था।

- भोर, नगरपालिका, मुख्याधिकारी, गजानन शिंदे 

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