श्रीकृष्ण, ब्रह्मा या महेश? किस भगवान ने की थी सबसे पहले माता सरस्वती की पूजा? जानिए क्या है पौराणिक कथा

Brahma Saraswati worship: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता सरस्वती की प्रथम पूजा भगवान ब्रह्मा ने की थी। उनके प्राकट्य से सृष्टि में ज्ञान और वाणी का संचार हुआ।
Goddess Saraswati Worship
ब्रह्मा जी और माता सरस्वती(सौ.सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Goddess Saraswati Worship: कल पूरे देशभर में बसंत पंचमी का पावन त्योहार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस दिन भक्त विशेष रूप से माता सरस्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। माता सरस्वती को ज्ञान, विद्या, वाणी, बुद्धि और संगीत की देवी माना जाता है। मान्यता है कि उनकी कृपा से व्यक्ति में सीखने की क्षमता, एकाग्रता और विवेक का विकास होता है।

बसंत पंचमी का दिन खास तौर पर विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन मां सरस्वती की आराधना करने से पढ़ाई में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और ज्ञान प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। वैसे तो बसंत पंचमी पर माता सरस्वती की पूजा से जुड़ी कई प्रचलित कथाएं हैं, जिनमें से एक के बारे में आज हम इस लेख के माध्यम से जानेंगे।

सर्वप्रथम किस भगवान ने की माता सरस्वती की पूजा?

पौराणिक कथा के अनुसार, बह्मा जी के आवाहन पर माता सरस्वती प्रकट हुई थीं। उन्होंने जब भगवान श्रीकृष्ण को देखा, तो उनके रूप पर मोहित हो गईं। उनके मन में भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने की अभिलाषा होने लगी। भगवान श्रीकृष्ण तो अतंर्यामी हैं। उन्होंने माता सरस्वती के मन की बात जान ली। तब उन्होंने माता सरस्वती से कहा कि वे राधा के प्रति ही समर्पित हैं। कृष्ण के साथ राधा का ही नाम जुड़ा है। कहा जाता है कि राधा माता लक्ष्मी जी का ही अवतार थीं। ऐसे में माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु एक दूसरे के पूरक हैं, फिर माता सरस्वती की भगवान श्रीकृष्ण को पति के रूप में पाने की अभिलाषा कैसे पूरी हो पाती?

बताया जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण और ब्रह्मा जी ने ही सबसे पहले मां सरस्वती की पूजा की थी। माता सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उनको वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को सरस्वती पूजा करेगा, उसे ज्ञान प्राप्ति में सफलता प्राप्त होगी।

भगवान श्रीकृष्ण के वरदान के कारण भी बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की पूजा होती है। हालांकि मां शारदा का इस तिथि को जन्मदिन भी है, इस वजह से उनको प्रसन्न करने के लिए पूजा की जाती है।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com