क्या है 2026 की 'शब-ए-बारात' की तारीख़? जानिए इस्लाम में क्या है इस दिन का महत्व

Shab-e-Barat Significance: शब-ए-बारात इस्लाम धर्म की पवित्र रात है, जिसे माफी और रहमत की रात माना जाता है। इस रात इबादत कर अल्लाह से गुनाहों की माफी मांगी जाती है।
Shab-E-Barat 2026 Date
शब-ए-बारात (सौ.सोशल मीडिया)
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Shab-E-Barat 2026 Date:शब-ए-बारात मुस्लिम समुदाय का प्रमुख त्योहार है। यह त्योहार मुस्लिम समुदाय के लिए बहुत ही खास और बरकत वाली रात मानी जाती है। इस्लाम धर्म के पाक महीना रमजान से करीब 14 दिन पहले शब-ए-बारात पूरे देशभर में मनाया जाता है। इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक, साल 2026 में शब-ए-बारात 4 फरवरी 2026 को मनाई जा सकती है।

शब-ए-बारात चंद्रमा देखने के बाद मनाया जाता है, हालांकि अधिकांश इस्लामिक त्योहारों की तिथियां चंद्रमा दिखने के बाद ही घोषित और सेलिब्रेट की जाती है।

कब है? साल 2026 शब-ए-बारात

इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक शब-ए-बारात शाबान महीने की 14वीं रात से शुरू होकर 15वीं तारीख की सुबह तक रहती है। साल 2026 में शब-ए-बारात 4 फरवरी 2026 को मनाई जा सकती है। हालांकि इसकी सही तारीख शाबान का चांद दिखने पर ही तय होगी।

शब-ए-बारात का क्या है मुस्लिम समुदाय में महत्व

जानकारी के अनुसार, यह रात इस्लामी कैलेंडर के शाबान महीने की 14वीं और 15वीं तारीख के बीच आती है। इसे गुनाहों की माफी (मगफिरत), दुआ और इबादत की रात कहा जाता है।

बताया जाता है कि, शब-ए-बारात की रात मुसलमान अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं, दिल से तौबा करते हैं और आने वाले कल के लिए दुआ करते हैं।

मान्यता है कि इसी रात अल्लाह इंसान के आने वाले साल की तकदीर का फैसला करते हैं। इसलिए लोग मस्जिदों या अपने घरों में पूरी रात जागकर नमाज पढ़ते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं और दुआ में वक्त बिताते हैं।

शब-ए-बारात की खास अहमियत

  • जानकार बताते है कि, यह रात गुनाहों की माफी और अल्लाह की रहमत पाने का सुनहरा मौका मानी जाती हैं।
  • माना जाता है कि सच्चे दिल से की गई दुआएं इस रात जरूर कबूल होती हैं।
  • इस रात इंसान अपने बीते कामों पर सोचता है और खुद को बेहतर बनाने का संकल्प लेता हैं।
  • लोग अपने गुजर चुके रिश्तेदारों को याद कर उनकी मगफिरत के लिए दुआ करते हैं।
  • गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना इस रात बहुत सवाब का काम माना जाता हैं।
  • कई घरों में खास पकवान बनते हैं और मस्जिदों में धार्मिक कार्यक्रम भी होते हैं।
  • कुल मिलाकर, शब-ए-बारात आत्मचिंतन, इबादत और अल्लाह के करीब आने की रात है, जो हर मुसलमान के लिए बेहद खास मानी जाती हैं।
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