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‘त्रिपुर भैरवी जयंती’ गुरुवार को, जानिए इस पूजा का महत्व, शुभ मुहूर्त नोट कर लीजिए
Maa Kali : ऐसा कहा जाता है कि मां भैरवी की पूजा से गुप्त शत्रुओं का नाश होता है। साथ ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए जान लेते हैं त्रिपुर भैरवी जयंती कब है?
- Written By: सीमा कुमारी

कब है साल 2025 त्रिपुर भैरवी जयंती (सौ.सोशल मीडिया)
Tripur Bhairavi Jayanti Kab Hai 2025: मां काली को समर्पित त्रिपुर भैरवी जयंती हर साल मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। मां त्रिपुर भैरवी को 10 महाविद्याओं में से माना जाता है। माता 5वीं महाविद्या कही जाती है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष त्रिपुर भैरवी जयंती 4 दिसंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। शास्त्रों में माता त्रिपुर भैरवी को मां काली का ही रूप माना गया है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट और अहंकार नष्ट हो जाते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी भैरवी भगवान भैरव की पत्नी हैं, जो शिव जी की एक उग्र अभिव्यक्ति हैं। ऐसा कहा जाता है कि मां भैरवी की पूजा से गुप्त शत्रुओं का नाश होता है। साथ ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आइए जान लेते हैं त्रिपुर भैरवी जयंती कब है? त्रिपुर भैरवी की पूजा का मुहूर्त क्या है?
कब है त्रिपुर भैरवी जयंती
आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, त्रिपुर भैरवी जयंती के लिए मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 4 दिसंबर को सुबह 08 बजकर 37 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन 5 दिसंबर को प्रात: 04 बजकर 43 मिनट पर हो जाएगी। ऐसे में त्रिपुर भैरवी जयंती 04 दिसंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी।
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ये है त्रिपुर भैरवी जयंती शुभ मुहूर्त
त्रिपुर भैरवी जयंती के दिन ब्रह्म मुहूर्त 05 बजकर 10 मिनट पर शुरू होगा। ये मुहूर्त 06 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगा। दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगा।
ये मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगा। निशिता पूजा का मुहूर्त रात में 11 बजकर 15 से शुरू होगा। ये मुहूर्त देर रात 12 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगा. निशिता मुहूर्त में ही तंत्र-मंत्र किया जाता है।
त्रिपुर भैरवी जयंती के दिन 3 शुभ योग
ज्योतिषयों के अनुसार, इस वर्ष त्रिपुर भैरवी जयंती के दिन 3 शुभ योग बन रहे है इस दिन दिन रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग बनेगा।
रवि योग सुबह में 06 बजकर 59 मिनट से दोपहर 02 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। शिव योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।
इसके बाद सिद्ध योग बनेगा।
ऐसे करें त्रिपुर भैरवी जयंती पूजा-विधि
- सुबह उठकर पवित्र स्नान करें।
- मंदिर को साफ करें।
- एक लकड़ी की चौकी पर मां की प्रतिमा स्थापित करें।
- मां को कुमकुम का तिलक लगाएं।
- लाल फूलों की माला अर्पित करें।
- फल, मिठाई आदि का भोग लगाएं।
- मां त्रिपुर भैरवी के मंत्रों का जाप करें।
- कपूर की आरती से पूजा का समापन करें।
जानिए क्या है त्रिपुर भैरवी जयंती की महिमा
मां आदिशक्ति के स्वरूप त्रिपुर भैरवी की पूजा तंत्र विद्याओं में महारथ हासिल करने के लिए की जाती है। इसके अलावा देवी भैरवी की पूजा तेरह अलग-अलग रूपों में की जाती है जैस -त्रिपुर भैरवी, चैतन्य भैरवी, सिद्ध भैरवी, भुवनेश्वर भैरवी, सम्पदाप्रद भैरवी, कालेश्वरी भैरवी, कामेश्वरी भैरवी, कमलेश्वरी भैरवी, रुद्र भैरवी, भद्र भैरवी, शतकुटी भैरवी और नित्या भैरवी।
ज्योतिषयों के अनुसार, माता त्रिपुर भैरवी की पूजा करने से योग्य संतान की प्राप्ति होती है और जीवन में सफलता मिलती है। इसके साथ ही सभी तरह की आर्थिक समस्याएं दूर हो जाती हैं।
इनकी उपासना से व्यक्ति को सफलता एवं सर्वसंपदा की प्राप्ति तो होती ही है साथ ही शक्ति-साधना तथा भक्ति-मार्ग में किसी भी रूप में त्रिपुर भैरवी की उपासना फलदायक है।
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भक्ति-भाव से मन्त्र-जप, पूजा, होम करने से भगवती त्रिपुर भैरवी प्रसन्न होती हैं। उनकी प्रसन्नता से साधक को सहज ही संपूर्ण अभीष्टों की प्राप्ति होती है। मनोवांछित वर या कन्या से विवाह के लिए भी इनकी पूजा की जाती है।
When is tripura bhairavi jayanti in the year 2025
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