कब शुरू हो रहा है होलाष्टक? ये 8 दिन क्यों कहे जाते हैं अशुभ? जानिए क्या भूल से भी न करें इस दौरान

Inauspicious Period: होलाष्टक इस साल 24 फरवरी से शुरू हो रहा है। यह 8 दिन का अशुभ काल माना जाता है, जिसमें मांगलिक और शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।
Holashtak Start Date
होलाष्टक (सौ.सोशल मीडिया)
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Holashtak Start Date: रंगों के त्योहार होली से ठीक आठ दिन पहले 'होलाष्टक' की शुरुआत हो जाती है। जो कि इस वर्ष 24 फरवरी, मंगलवार को सुबह 07:03 बजे से शुरु हो रहा है, जो 3 मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगा। इन आठ दिनों की अवधि को ज्योतिष शास्त्र में शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही अवधि मानी जाती है जब असुर राज हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद को अनेक कष्ट दिए थे। इसलिए इन आठ दिनों को विशेष और सावधानीपूर्ण समय माना जाता है।

क्यों मानी जाती है अशुभ अवधि?

मान्यता है कि इन दिनों ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। कहा जाता है कि इस दौरान किए गए शुभ कार्यों का पूर्ण फल नहीं मिलता।

होलाष्टक में क्या करें?

  • भगवान विष्णु और प्रह्लाद की पूजा करें
  • भजन-कीर्तन और मंत्र जाप करें
  • दान-पुण्य और जरूरतमंदों की सहायता करें
  • आत्मचिंतन और सकारात्मक संकल्प लें

होलाष्टक क्या न करें?

  • विवाह और अन्य मांगलिक कार्य
  • नया व्यापार या बड़ा निवेश
  • गृह प्रवेश या शुभ यात्रा की शुरुआत
  • होलाष्टक का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक दृष्टि से भले ही इसे सावधानी का समय माना जाता है, लेकिन आध्यात्मिक साधना और भक्ति के लिए यह अवधि विशेष फलदायी मानी जाती है। होलाष्टक होली से पहले आने वाले आठ दिनों की विशेष अवधि होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह समय भक्ति, संयम और आत्मचिंतन का प्रतीक है।

  • भक्त प्रह्लाद से जुड़ा प्रसंग

कथा के अनुसार, इसी अवधि में असुर राजा हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को कष्ट दिए थे। इसलिए इन दिनों को धैर्य, विश्वास और भक्ति की परीक्षा का समय माना जाता है।

  • आध्यात्मिक साधना का समय

हालांकि इस दौरान विवाह और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं, लेकिन पूजा-पाठ, मंत्र जाप और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।

  • नकारात्मकता से मुक्ति

होलाष्टक आत्मशुद्धि और नकारात्मक विचारों को त्यागने का अवसर देता है, जो अंत में के साथ समाप्त होता है।

इस प्रकार, होलाष्टक केवल अशुभ काल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का समय भी है।

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