कलेक्ट्रेट पर कुर्की की कार्रवाई टली, 21.09 लाख भुगतान का लिखित आश्वासन; 10 मार्च तक का दिया समय

Wardha Payment Dispute Case: वर्धा के कोल्हापुरी बंधारा निर्माण में भुगतान न होने पर मामला न्यायालय पहुंचा। कुर्की का आदेश जारी हुआ, लेकिन विभाग ने 10 मार्च 2026 तक बकाया चुकाने का लिखित आश्वासन दिया।
The Collectorate's attachment proceedings were postponed, with a written assurance of payment of 21.09 lakh rupees; time given until March 10.
Wardha district Kolhapuri Weir Project( सोर्स: सोशल मीडिया )
Published on
Updated on

Wardha district Kolhapuri Weir Project: वर्धा कोल्हापुरी बांध (बंधारा) निर्माण कार्य के लिए खरीदे गए सामग्री का भुगतान समय पर नहीं किए जाने से उपजा विवाद आखिरकार न्यायालय तक पहुंचा और मामला जिला कलेक्ट्रेट पर कुर्की की कार्रवाई तक जा पहुंचा।

हालांकि संबंधित विभाग द्वारा 10 मार्च 2026 तक बकाया राशि चुकाने का लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद कुकर्की की कार्रवाई टल गई। मामला समुद्रपुर तहसील के साखरा और तलेगांव क्षेत्र में निर्मित कोल्हापुरी बांध से जुड़ा है।

मृदा व जलसंधारण विभाग ने इस निर्माण कार्य के लिए विभिन्न सामग्री की खरीदी मे। दर्शन कंस्ट्रक्शन कंपनी, वर्धा से की थी, लेकिन तय समय पर भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद ठेकेदार एजेंसी ने हिंगनघाट स्थित न्यायालय में याचिका दायर की।

न्यायालय ने 6 फरवरी 2023 को ठेकेदार के पक्ष में निर्णय सुनाया। इसके बावजूद भुगतान नहीं होने पर मामला दोबारा न्यायालय पहुंचा। अंततः न्यायालय ने बकाया वसूली के लिए कुर्की का आदेश जारी कर दिया।

DM कार्यालय में मची खलबली

न्यायालय के आदेश के पालन में 23 फरवरी को न्यायालय के बेलिफ सुशील प्रभाकर मानवटकर और शिकायतकर्ता समुद्रे जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। इस अचानक कार्रवाई से प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई। प्रारंभिक चर्चा जिला कलेक्टर वान्मधी सी. के साथ हुई। इसके बाद मृदा व जलसंधारण विभाग के अधिकारियों को तलब किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर विभाग की ओर से वरिष्ठ लिपिक गणेश नेहारे कलेक्ट्रेट पहुंचे, उपजिलाधिकारी (भूमि संपादन) के कक्ष में विस्तृत चर्चा के बाद विभाग ने 21 लाख 9 हजार 909 रुपये की बकाया राशि 10 मार्च 2026 से पहले अदा करने का लिखित आश्वासन याचिकाकर्ता को दिया। ठेकेदार द्वारा इस आश्वासन को स्वीकार करने के बाद कलेक्ट्रेट पर कुर्की की कार्रवाई टाल दी गई।

दिसंबर 2015 में पूरा हुआ था काम

जानकारी के अनुसार, मे। दर्शन कंस्ट्रक्शन कंपनी को 9 अक्टूबर 2015 को कार्यादेश जारी किया गया था। आदेश मिलने के बाद कंपनी ने दिसंबर 2015 में निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया।

भुगतान के लिए बार-बार मांग किए जाने के बावजूद राशि नहीं मिलने पर 23 दिसंबर 2016 को न्यायालय की शरण ली गई। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 6 फरवरी 2023 को न्यायालय ने ठेकेदार के पक्ष में फैसला सुनाया, लेकिन निर्णय के बाद भी भुगतान नहीं किया गया।

परिणामस्वरूप न्यायालय को अंततः कुकी का आदेश जारी करना पड़ा। हालांकि प्रशासन द्वारा तय समयसीमा में भुगतान का भरोसा दिए जाने से फिलहाल जिला कलेक्ट्रेट पर कुकर्की की नामुष्की टल गई है।

  • साखरा व तलेगांव में निर्मित बांध से जुड़ा मामला
  • मे. दर्शन कंस्ट्रक्शन कंपनी से की गई सामग्री की खरीदी
  • सामग्री का भुगतान समय पर नहीं किए जाने से उपजा विवाद
  • ठेकेदार एजेंसी ने हिंगनघाट स्थित कोर्ट में की याचिका दायर
  • बकाया वसूली के लिए कोर्ट ने दिया था कुर्की का आदेश।
Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com