रोजे में गलती से पी लिया पानी? तो क्या अब रोजा जारी रख सकते हैं? यहां जानिए सटीक जवाब।

Roza Rules: रोज़ा सिर्फ भूख‑प्यास सहने का नाम नहीं है, बल्कि सही व्यवहार और संयम भी जरूरी है। लेकिन अगर रोज़ा रखते समय गलती से पानी पी लिया जाए, तो क्या रोज़ा जारी रखा जा सकता है? यहां जानिए जवाब।
Ramadan Fasting
रमज़ान (सौ.सोशल मीडिया)
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Ramadan Fasting: रमज़ान का पवित्र महीना चल रहा है, और यह महीना पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए  इबादत, सब्र और आत्मसंयम का समय माना जाता है। इस दौरान मुस्लिम भाई बहन पूरा महीना सहरी से लेकर इफ्तार तक खाने‑पीने से परहेज करते है।

रोज़ा सिर्फ भूख और प्यास सहने का नाम नहीं है। यह एक आध्यात्मिक अभ्यास है जिसमें व्यक्ति अपने इरादों, व्यवहार और आदतों को सुधारता है। रमज़ान के दौरान

रमज़ान का आत्म-संयम और अनुशासन का महीना

रमज़ान का महीना इबादत, आत्म-संयम और अनुशासन का महीना माना जाता है। इस दौरान सुबह सहरी से लेकर इफ्तार तक खाने-पीने से दूर रहना अनिवार्य होता है. लेकिन कभी-कभी भूल होना स्वाभाविक है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति भूल से कुछ खा ले या पानी पी ले, तो उसका रोज़ा नहीं टूटता है। व्यक्ति अपना रोज़ा जारी रख सकता है.

सहरी से इफ्तार तक खाने‑पीने से परहेज करना।

  • गुस्सा, झूठ, बदतमीजी और गलत कामों से दूर रहना।
  • अपनी इबादत और अच्छे कर्मों पर ध्यान देना।
  • गलती से पानी पी लेने की स्थिति

अकस्मात या भूलवश पानी पी लेना

अगर कोई व्यक्ति भूलकर रोज़ा रखते समय पानी पी ले, तो इस स्थिति में रोज़ा टूटता नहीं। इस पर इरादा नहीं था और यह गलती या अनजाने में हुआ।

  • उदाहरण: किसी को प्यास लग रही थी और उसने अनजाने में पानी पी लिया।
  • इस स्थिति में सिर्फ अल्लाह से माफ़ी मांगना और रोज़ा जारी रखना पर्याप्त है।

जानबूझकर पानी पी लेना

यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर रोज़ा रखते समय खाने या पानी पीता है, तो इस स्थिति में रोज़ा टूट जाता है और उसे बाद में क़ज़ा (रोज़ा पूरा करना) करना पड़ता है।

रोज़ा जारी रखने के लिए उपाय

  • भूलवश पानी पी जाने पर तुरंत अपनी गलती स्वीकार करें और अल्लाह से माफ़ी मांगें।
  • रोज़ा जारी रखें और बाकी समय संयम बनाए रखें।
  • सहरी और इफ्तार के समय भोजन और पानी का विशेष ध्यान रखें।

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ध्यान देने योग्य बातें

रोज़ा की वास्तविक सफलता भूख‑प्यास सहने में नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और इरादों में सुधार में होती है।

गलती होने पर आत्मग्लानि या निराशा में न जाएं। इसे सीखने का अवसर समझें।

रोज़ा के दौरान संयमित और सजग रहना सबसे महत्वपूर्ण है।

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