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आज है खाटू श्याम जी की जयंती, जानिए क्यों कहलाते हैं वो ‘हारे का सहारा’, श्रीकृष्ण से क्या है संबंध
Khatu Shyam: यह सच है कि खाटू श्याम बाबा की महिमा से आज हर कोई वाकिफ है। उनकी महिमा इस बात में निहित है कि वे 'हारे का सहारा' हैं, भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं और दुखों से मुक्ति दिलाते हैं।
- Written By: सीमा कुमारी

भगवान खाटू श्याम जी कौन हैं (सौ.सोशल मीडिया)
Khatu Shyam Birthday: आज शनिवार, 1 नवंबर, 2025 को बाबा खाटू श्याम जी का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। देशभर में भक्त अपने-अपने घरों और मंदिरों में खाटू श्याम जी का भी जन्मोत्सव मनाते हैं। अगर बात बाबा खाटू श्याम जी का जन्मोत्सव की करें तो राजस्थान की खाटू नगरी में स्थित बाबा श्याम का जन्मोत्सव बड़े ही धूम-धाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता हैं। क्योंकि, इस मंदिर से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है।
हर साल यहां देश-विदेश से भक्त दर्शन करने आते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर भगवान के दरबार में हाजिरी लगाते हैं। आपको जानकारी के लिए बता दें कि, खाटू श्याम जी को लेकर लोगों की भक्ति इतनी गहरी है कि घरों में उनकी तस्वीरें, लॉकेट्स, और मूर्तियां आम तौर पर देखी जा सकती हैं।
इस मंदिर से जुड़ी एक बात है, जो शायद सबको पता ना हो कि उन्हें ‘हारे का सहारा’ क्यों कहा जाता है। यह उपाधि उनके नाम के साथ क्यों जुड़ी। ऐसे में चलिए जानते हैं खाटू श्याम जी को ‘हारे का सहारा’ की उपाधि क्यों दी गई।
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सबसे पहले जानें भगवान खाटू श्याम जी कौन हैं
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिन खाटू श्याम जी के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं किलोमीटर का सफर तय करते हैं, उनका वास्तविक नाम बर्बरीक था। वे महाभारत काल के एक महान योद्धा थे, जो पांडवों के भाई भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र थे। बचपन से ही उन्हें युद्ध कौशल में गहरी रुचि थी और उन्होंने तीन ऐसे बाण प्राप्त किए थे, जिनसे वे किसी भी युद्ध का अंत कुछ ही क्षणों में कर सकते थे।
उन्हें भगवान शिव, अग्निदेव और अपनी साधना से यह शक्ति प्राप्त हुई थी। लेकिन उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने महाभारत के युद्ध में हिस्सा लेने का निर्णय लिया।
आखिर ‘हारे का सहारा’ क्यों कहलाते हैं खाटू श्याम जी
आपको बता दें, बर्बरीक का सिद्धांत था कि वे हमेशा उस पक्ष का साथ देंगे जो युद्ध में हार रहा होगा। जब महाभारत का युद्ध प्रारंभ होने वाला था, तब वे युद्धभूमि की ओर बढ़े। लेकिन जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण को इसकी जानकारी हुई, वे चिंतित हो उठे।
श्रीकृष्ण जानते थे कि बर्बरीक का समर्थन जिस भी पक्ष को मिलेगा, उसकी जीत निश्चित हो जाएगी और युद्ध का संतुलन बिगड़ जाएगा। यही कारण था कि भगवान कृष्ण ब्राह्मण का वेश धारण कर बर्बरीक के पास पहुंचे और उनसे उनका शीश दान में मांग लिया।बर्बरीक ने बिना झिझक अपने गुरु, धर्म और नीतियों का पालन करते हुए अपना शीश श्रीकृष्ण को दान कर दिया।
उनके इस त्याग, निष्ठा और बलिदान से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे अपने ही नाम से नहीं, बल्कि श्रीकृष्ण के नाम ‘श्याम’ से पूजे जाएंगे।
साथ ही वे हर उस व्यक्ति का सहारा बनेंगे, जो दुख में हो और जिसे कोई उम्मीद न हो। इसलिए उन्हें ‘हारे का सहारा’ कहा जाने लगा।
खाटू श्याम जी की क्या है महिमा
ऐसा कहा जाता है कि खाटू श्याम जी के दरबार में जो भी सच्चे मन से अपनी मनोकामना लेकर आता है, उसकी हर इच्छा पूरी होती है। भक्तों का यह विश्वास है कि श्याम बाबा केवल उन लोगों की नहीं सुनते जो सुख में होते हैं, बल्कि वे खासकर उन लोगों के साथ खड़े होते हैं जो संघर्ष में होते हैं, जो हार के कगार पर होते हैं।
यही कारण है कि वे ‘हारे का सहारा’ कहलाते हैं। जिसका मतलब है जीवन की कठिन परिस्थितियों में एकमात्र उम्मीद का नाम।
कैसे पहुंचे खाटू श्याम मंदिर दर्शन के लिए
आपको बता दें, खाटू श्याम मंदिर जाने की योजना बना रहे है तो यहां पहुंचना काफी आसान है। यहां का सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन रिंगास जंक्शन (RGS) है, जो मंदिर से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
वहां से आप जीप, ऑटो या टैक्सी के द्वारा मंदिर पहुंच है। बता दें, दिल्ली, जयपुर, अलवर और अन्य शहरों से रिंगास के लिए कई ट्रेनें उपलब्ध हैं। अगर आप हवाई यात्रा करना चाहते हैं, तो जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे पास का हवाई अड्डा है, जो खाटू श्याम मंदिर से लगभग 80 किलोमीटर दूर है।
इसे भी पढ़ें– आज है देवउठनी एकादशी, यहां जानिए पूजन विधि से लेकर शुभ मुहूर्त तक सबकुछ
जयपुर से सड़क मार्ग से खाटू पहुंचना सुविधाजनक होता है, जहां से कई निजी बसें और टैक्सी आसानी से मिल जाती है।
When is the birth anniversary of khatu shyam ji
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